अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी टैरिफ नीति को “तेज, असरदार और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य” बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से इसकी मंजूरी मांगी है। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल और विदेशी प्रतिस्पर्धा से अमेरिकी उद्योगों को बचाने के लिए सख्त टैरिफ व्यवस्था लागू करना समय की जरूरत है। ट्रंप का यह बयान आने वाले समय में अमेरिका की आर्थिक और व्यापारिक दिशा को लेकर नई बहस छेड़ रहा है।
ट्रंप ने दावा किया कि उनकी प्रस्तावित टैरिफ नीति न केवल अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती देगी, बल्कि घरेलू रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगी। उनके अनुसार, वर्तमान वैश्विक व्यापार ढांचे में कई ऐसे प्रावधान हैं, जिनका फायदा विदेशी कंपनियां उठा रही हैं और इससे अमेरिकी उद्योग पिछड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका को अपने आर्थिक हित सुरक्षित रखने हैं, तो उसे आयात पर सख्त शुल्क लगाने और व्यापारिक असंतुलन कम करने के कदम उठाने होंगे।
सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी की मांग पर ट्रंप ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आर्थिक निर्णयों को कानूनी स्पष्टता मिलना आवश्यक है। उन्होंने यह तर्क दिया कि मजबूत आर्थिक ढांचा किसी भी देश की सुरक्षा का मूल आधार होता है, इसलिए टैरिफ नीति को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना जरूरी है।
ट्रंप के इस कदम ने राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रिया उत्पन्न की है। समर्थकों का कहना है कि यह नीति अमेरिकी उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती देगी, जबकि आलोचकों का आरोप है कि ऐसे कदम व्यापारिक तनाव बढ़ा सकते हैं और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डाल सकते हैं।
अभी यह देखना बाकी है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है। लेकिन ट्रंप की इस पहल से यह स्पष्ट है कि अमेरिका में आर्थिक राष्ट्रवाद और संरक्षणवादी नीतियां एक बार फिर केंद्र में आ रही हैं, जिसका प्रभाव वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।





