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वार्ड सदस्य पदों पर चुनावी उदासीनता, 671 सीटों पर कोई नामांकन नहीं

उत्तराखंड के पंचायत चुनाव में वार्ड सदस्य (ग्राम पंचायत सदस्य) पदों पर स्पष्ट उदासीनता देखने को मिल रही है। जिले के छह विकासखंडों में कुल 3397 पदों में से 671 सीटों पर एक भी नामांकन नहीं हुआ है, जबकि केवल 1556 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि विकास की बुनियादी इकाई ग्राम पंचायत तभी प्रभावी हो सकती है जब वार्ड स्तर पर प्रतिनिधित्व मज़बूत हो। मगर इस बार ग्रामीण स्तर पर लोकतांत्रिक भागीदारी में गंभीर कमी देखी जा रही है।

चकराता और कालसी में बेहद कम नामांकन

• चकराता: 841 पद, सिर्फ 43 प्रत्याशी
• कालसी: 793 पद, सिर्फ 46 प्रत्याशी
• रायपुर: 288 पद, मात्र 12 नामांकन
इसके विपरीत सहसपुर, विकासनगर और डोईवाला जैसे विकासखंडों में नामांकन की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही।

• सहसपुर: 496 पद, 494 नामांकन
• विकासनगर: 569 पद, 582 नामांकन
• डोईवाला: 410 पद, 279 नामांकन
अन्य पदों पर है मुकाबला
वार्ड सदस्य पदों की तुलना में ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत पदों पर लोगों की रुचि कहीं अधिक देखी जा रही है:
पद कुल सीटें प्रत्याशी
ग्राम प्रधान 409 1018
क्षेत्र पंचायत सदस्य 220 698
जिला पंचायत सदस्य 30 113
लोकतंत्र की जड़ पर असर
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, वार्ड स्तर पर भागीदारी की कमी न केवल स्थानीय शासन की प्रभावशीलता को प्रभावित करेगी, बल्कि इससे स्थानीय विकास योजनाओं और जनता की भागीदारी पर भी असर पड़ सकता है।

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