बेंगलुरु। भारतीय रेलवे हाई-स्पीड रेल नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार को बेंगलुरु और मुंबई के बीच चलने वाली वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई। इस दौरान उन्होंने देश में प्रस्तावित बुलेट ट्रेन परियोजनाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
रेल मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4,000 किलोमीटर के बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को मंजूरी दी है। आने वाले वर्षों में 3,000 किलोमीटर के अतिरिक्त कॉरिडोर की भी घोषणा की जाएगी। इनमें बेंगलुरु-पुणे कॉरिडोर भी शामिल हो सकता है, जो हुब्बली के रास्ते कर्नाटक को महाराष्ट्र से जोड़ेगा।
बेंगलुरु में बन रही स्वदेशी बुलेट ट्रेन
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का निर्माण बेंगलुरु स्थित बीईएमएल (BEML) प्लांट में तेजी से जारी है। इस ट्रेन को भारतीय मौसम और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। इसकी अधिकतम परीक्षण गति 280 किलोमीटर प्रति घंटा और परिचालन गति 249 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।
करीब 202 मीटर लंबी इस ट्रेन में आठ कोच होंगे। इनमें चार मोटर कार और चार ट्रेलर कार शामिल हैं। ट्रेन में एक साथ 557 यात्री सफर कर सकेंगे। इसमें सात स्टैंडर्ड क्लास और एक एग्जीक्यूटिव क्लास कोच होगा। दिव्यांग यात्रियों के लिए दो विशेष सीटें भी आरक्षित रहेंगी।
दक्षिण भारत को मिलेगा बुलेट ट्रेन का लाभ
रेल मंत्री ने बताया कि प्रस्तावित दक्षिणी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर बेंगलुरु, हैदराबाद, अमरावती और चेन्नई को जोड़ेगा। इसके शुरू होने के बाद बेंगलुरु से चेन्नई की यात्रा महज 73 मिनट और बेंगलुरु से हैदराबाद की यात्रा लगभग दो घंटे 10 मिनट में पूरी हो सकेगी।
इसके अलावा बेंगलुरु-मंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस भी अगले कुछ सप्ताह में शुरू होने की उम्मीद है। इस मार्ग पर विद्युतीकरण और परीक्षण का काम पूरा हो चुका है।
रेल मंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से दक्षिण भारत के प्रमुख आर्थिक और तकनीकी केंद्रों के बीच संपर्क बेहतर होगा तथा यात्रियों को तेज और आधुनिक रेल सुविधाएं मिलेंगी।





