मॉस्को। रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लंबे शासन के बीच सितंबर 2026 में संसदीय चुनाव हुए। पुतिन वर्ष 2000 से रूस की सत्ता के केंद्र में रहे हैं और उनकी पार्टी यूनाइटेड रशिया लंबे समय से देश की राजनीति में प्रभावशाली रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब राजनीतिक व्यवस्था में सत्ता पक्ष का दबदबा बना हुआ है, तब चुनावों की आवश्यकता क्यों बनी हुई है।
रूस में इस बार 450 सदस्यीय स्टेट ड्यूमा के लिए चुनाव हुए। इसके साथ कई क्षेत्रीय चुनाव भी कराए गए। यह 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पहला संसदीय चुनाव था। चुनाव तीन दिनों तक चले और मॉस्को समेत कई क्षेत्रों में पारंपरिक मतदान के साथ ऑनलाइन वोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध रही।
सरकार के लिए चुनाव क्यों महत्वपूर्ण
रूस में चुनाव केवल संसद के गठन तक सीमित नहीं हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चुनाव सरकार को जनता के समर्थन और राजनीतिक वैधता का संदेश देने का अवसर भी प्रदान करते हैं। पुतिन ने भी चुनावों को राष्ट्रीय एकता और देश के सामने मौजूद चुनौतियों के संदर्भ में पेश किया।
विपक्षी दलों और कुछ स्वतंत्र पर्यवेक्षकों ने रूस की चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा सीमित है और कुछ विपक्षी उम्मीदवारों तथा दलों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखा गया। रूसी अधिकारियों ने चुनाव प्रक्रिया को संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप बताया है।
मॉस्को का एक वोट क्यों अहम
मॉस्को रूस का राजनीतिक और आर्थिक केंद्र होने के साथ-साथ डिजिटल मतदान का भी प्रमुख क्षेत्र है। यहां ड्यूमा के चुनाव के अलावा स्थानीय प्रतिनिधियों के चुनाव भी होते हैं। एक मत सीधे तौर पर किसी उम्मीदवार या पार्टी के पक्ष में जाता है, लेकिन बड़ी संख्या में मत मिलकर संसद की संरचना तय करते हैं।
2026 के चुनाव में यूनाइटेड रशिया ने 450 सदस्यीय ड्यूमा में 355 सीटें हासिल कीं, जबकि पार्टी को पार्टी-लिस्ट मतदान में करीब 57.83 प्रतिशत वोट मिले।
इस तरह रूस में एक वोट का महत्व केवल स्थानीय प्रतिनिधि चुनने तक सीमित नहीं है। यह संसद की संरचना, कानून बनाने की प्रक्रिया और देश की राजनीतिक दिशा को प्रभावित करने वाली व्यापक व्यवस्था का हिस्सा है।




