नई दिल्ली। देश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में यह नई ऊंचाई पर पहुंचने की संभावना है। केंद्र सरकार का अनुमान है कि वर्ष 2027 तक देश में बिजली की अधिकतम मांग 3 लाख मेगावाट (300 गीगावाट) के स्तर को पार कर सकती है। इसे देखते हुए उत्पादन क्षमता बढ़ाने और बिजली आपूर्ति को मजबूत बनाने की दिशा में व्यापक तैयारी शुरू कर दी गई है।
ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, बढ़ती आबादी, औद्योगिक गतिविधियों में तेजी, शहरीकरण, एयर कंडीशनर और अन्य विद्युत उपकरणों के बढ़ते उपयोग के कारण बिजली की खपत में लगातार इजाफा हो रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें नई ताप, जल और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को गति दे रही हैं।
सरकार का लक्ष्य है कि मांग के अनुरूप पर्याप्त उत्पादन क्षमता उपलब्ध रहे, ताकि गर्मियों या अन्य पीक सीजन के दौरान बिजली संकट की स्थिति पैदा न हो। इसके लिए कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के विस्तार के साथ-साथ सौर, पवन और अन्य हरित ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी भी तेजी से बढ़ाई जा रही है। ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने और ग्रिड क्षमता में वृद्धि पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि देश की अर्थव्यवस्था के विस्तार और इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग के साथ आने वाले वर्षों में बिजली की मांग और तेज़ी से बढ़ेगी। ऐसे में उत्पादन, भंडारण और वितरण प्रणाली को समय रहते मजबूत बनाना आवश्यक होगा, ताकि उद्योगों और घरेलू उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
सरकार का कहना है कि भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक योजना पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य देश में पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और बढ़ती मांग के अनुरूप विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करना है।





