नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने की संभावना है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार यह सत्र करीब तीन सप्ताह तक चल सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय अभी कैबिनेट कमेटी ऑन पार्लियामेंट्री अफेयर्स (CCPA) की मंजूरी के बाद लिया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, इस सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश करने और लंबित कानूनों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। पिछले सत्र में पारित नहीं हो सके कुछ प्रमुख विधेयकों को संशोधित स्वरूप में दोबारा लाया जा सकता है। इसके अलावा विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े विधायी और नीतिगत प्रस्तावों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
संसद के इस सत्र में राजनीतिक गतिविधियां भी तेज रहने के आसार हैं। हाल में हुए राजनीतिक घटनाक्रम, विभिन्न दलों के भीतर हुए बदलाव और विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे कई मुद्दों को लेकर दोनों सदनों में तीखी बहस देखने को मिल सकती है। लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष कुछ सांसदों की अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता संबंधी मांग भी लंबित है, जिस पर सभी की नजर रहेगी।
सरकार की प्राथमिकता आर्थिक सुधारों, प्रशासनिक बदलावों और संवैधानिक महत्व के कुछ प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की रहेगी। वहीं विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, किसानों के मुद्दे और अन्य समसामयिक विषयों पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर रहा है। ऐसे में मानसून सत्र के दौरान दोनों सदनों में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक चर्चा और राजनीतिक टकराव की संभावना है।
आमतौर पर संसद के मानसून और शीतकालीन सत्र करीब चार सप्ताह तक चलते हैं, लेकिन परिस्थितियों के अनुसार इनकी अवधि कम या अधिक भी हो सकती है। इस बार भी सत्र की अंतिम अवधि और एजेंडा पर केंद्र सरकार की औपचारिक घोषणा का इंतजार है।





