नई दिल्ली। घरेलू निर्माताओं की शिकायतों के बाद भारत ने चीन से आयात किए जाने वाले पांच रासायनिक और इंजीनियरिंग उत्पादों के खिलाफ एंटी-डंपिंग जांच शुरू कर दी है। यह जांच वाणिज्य मंत्रालय के अधीन व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) कर रहा है।
जिन उत्पादों को जांच के दायरे में लिया गया है, उनमें पर्सल्फेट्स, क्लावुलैनिक एसिड, काउंटरबैलेंस फोर्कलिफ्ट्स, आंतरिक ग्रूव वाले तांबे के ट्यूब एवं पाइप और कैप्रोलैक्टम शामिल हैं। इनमें कई उत्पाद रासायनिक, कपड़ा और इंजीनियरिंग उद्योगों में इस्तेमाल होते हैं।
भारतीय कंपनियों ने आरोप लगाया है कि चीन से इन उत्पादों का आयात ऐसे दामों पर किया जा रहा है, जिससे घरेलू निर्माताओं को नुकसान उठाना पड़ रहा है। कंपनियों का कहना है कि सस्ते आयात के कारण उनके उत्पादन और कारोबार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसी आधार पर उन्होंने सरकार से एंटी-डंपिंग शुल्क लगाने की मांग की है।
एंटी-डंपिंग जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं किसी देश से उत्पादों को सामान्य बाजार मूल्य से कम कीमत पर तो नहीं बेचा जा रहा है और इससे घरेलू उद्योग को नुकसान तो नहीं हो रहा। जांच के दौरान आयात की कीमतों और घरेलू उद्योग पर पड़े प्रभाव का आकलन किया जाएगा।
डीजीटीआर जांच के बाद एंटी-डंपिंग शुल्क लगाने की सिफारिश कर सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय शुल्क लगाने को लेकर वित्त मंत्रालय करता है।
सरकार की ओर से ऐसे कदम ऐसे समय उठाए जा रहे हैं, जब चीन से आयात और व्यापार घाटे को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। डीजीटीआर के रिकॉर्ड के अनुसार सितंबर के अंत में भी चीन से जुड़े कई उत्पादों पर एंटी-डंपिंग जांच शुरू की गई थी।
फिलहाल इन पांच उत्पादों पर जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इन पर एंटी-डंपिंग शुल्क लगाने की सिफारिश की जाती है या नहीं।





