नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि आने वाला समय दुनिया के लिए उथल-पुथल और अनिश्चितताओं से भरा हो सकता है। संघर्षों, टैरिफ में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक दबाव के बीच भारत को अपनी रणनीति और नीतियों में इन चुनौतियों को ध्यान में रखना होगा। हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि भारत इन परिस्थितियों का मजबूती से सामना करने में सक्षम है।
पांचवें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में संवाद के दौरान जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय कई तनावों और संघर्षों से गुजर रही है। ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक सुरक्षा जैसी चुनौतियां भी देशों के सामने हैं। ऐसे माहौल में भारत को अपनी सोच, योजना और प्रतिक्रिया को बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप तैयार करना होगा।
भारत-अमेरिका समझौते से बढ़ेगी आर्थिक क्षमता
विदेश मंत्री ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता दुनिया के एक बड़े और लाभकारी बाजार तक भारत की पहुंच को बढ़ा सकता है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने की संभावना है। अमेरिका भारत का प्रमुख आर्थिक, व्यापारिक और रक्षा साझेदार है।
जयशंकर ने कहा कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था में मौजूद सभी समस्याओं के लिए केवल अमेरिका को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। बाजार में कई विकृतियां अन्य देशों की नीतियों से भी पैदा हुई हैं और उनका वस्तुनिष्ठ तरीके से आकलन किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने हाल के वर्षों में यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के साथ व्यापारिक समझौतों के जरिए अपने आर्थिक संबंधों को विस्तार दिया है। इससे भारत के वैश्विक व्यापारिक रिश्तों में संतुलन बनाने में मदद मिलेगी।
जयशंकर ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण जरूर हैं, लेकिन भारत का पिछला अनुभव बताता है कि देश कठिन परिस्थितियों से निपटने में सक्षम है। ऐसे समय में मजबूत आर्थिक आधार और व्यापक वैश्विक साझेदारी भारत के लिए महत्वपूर्ण होगी।





