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भारत वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्रभाव के साथ नई ऊंचाइयों के लिए संकल्पित: जयशंकर

नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि मौजूदा अशांत वैश्विक माहौल के बावजूद भारत नई ऊंचाइयों को हासिल करने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। उन्होंने कहा कि वैश्विक मंचों पर भारत की अहमियत और प्रभाव लगातार बढ़ा है और इसके साथ देश की जिम्मेदारियां भी बढ़ी हैं।

भारतीय विश्व मामलों की परिषद के राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जयशंकर ने कहा कि भारत की विदेश नीति अब पहले से अधिक जन-केंद्रित हुई है। उन्होंने कहा कि एक प्राचीन सभ्यता का आधुनिक विश्व में अपनी गरिमापूर्ण जगह फिर से बनाना महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाक्रम है।

जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय कई चुनौतियों से गुजर रही है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था कमजोर हुई है और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के कारण वैश्विक व्यवस्था के बंटने का खतरा बढ़ा है। उन्होंने विनिर्माण के एक ही क्षेत्र में अत्यधिक केंद्रीकरण को भी जोखिमपूर्ण बताया।

विदेश मंत्री ने कहा कि ऐसे माहौल में भारत ‘मेक इन इंडिया’ और आर्थिक विविधीकरण के माध्यम से अपनी आत्मनिर्भरता मजबूत कर रहा है। खाड़ी और यूक्रेन जैसे संकटों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों से भारत के संबंध होने के कारण संतुलन साधना महत्वपूर्ण है। इसके लिए रणनीतिक अनुकूलन और गहरे संवाद की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि भारत अंतहीन युद्धों के दौर को खत्म करने की बात इसलिए करता है क्योंकि शांति और स्थिरता वैश्विक प्रगति तथा समृद्धि के लिए आवश्यक हैं। जयशंकर के अनुसार, बदलती भू-राजनीति के बीच भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और बहुध्रुवीयता देश की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी कहा कि मानवता की शांति किसी एक देश के व्यक्तिगत हित से अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने वैश्विक चुनौतियों को सामूहिक समस्या मानकर मिलकर समाधान तलाशने पर जोर दिया।

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