नई दिल्ली। देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर एक बड़ी और चौंकाने वाली साजिश का खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI और प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) द्वारा संचालित एक संयुक्त आतंकी मॉड्यूल को ध्वस्त कर दिया है। इस ऑपरेशन के तहत दिल्ली और पंजाब के विभिन्न इलाकों से 11 संदिग्ध जासूसों और आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए आरोपियों पर भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों के संवेदनशील ठिकानों की जासूसी करने और उनकी गोपनीय जानकारी सीमा पार भेजने का गंभीर आरोप है।
साजिश का तरीका: सोलर कैमरों से लाइव ‘जासूसी’
गाजियाबाद पुलिस द्वारा हाल ही में पकड़े गए 21 आरोपियों के बाद, अब दिल्ली पुलिस ने भी उसी तकनीक वाले मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है।
- हाई-टेक निगरानी: इस गिरोह को विशेष रूप से सैन्य ठिकानों और संवेदनशील सरकारी भवनों के आसपास सोलर सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम सौंपा गया था। ये कैमरे सौर ऊर्जा से चलते थे, जिससे बिजली कटने की स्थिति में भी पाकिस्तान में बैठे आकाओं को इन ठिकानों की ‘लाइव फुटेज’ मिलती रहती थी।
- डिजिटल जासूसी: गिरफ्तार किए गए आरोपियों को सैन्य प्रतिष्ठानों की तस्वीरें और वीडियो बनाने का टास्क दिया गया था। इन सूचनाओं को कूटबद्ध (encrypted) संदेशों के माध्यम से आईएसआई को भेजा जा रहा था।
ISI और बीकेआई का खतरनाक गठजोड़
जांच में यह बात सामने आई है कि यह मॉड्यूल न केवल जासूसी कर रहा था, बल्कि पंजाब में अस्थिरता पैदा करने के लिए आतंकी गतिविधियों की योजना भी बना रहा था।
- खालिस्तानी लिंक: प्रतिबंधित संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) के सदस्य आईएसआई के सीधे संपर्क में थे। पाकिस्तान इस गठजोड़ का उपयोग भारत के भीतर ‘स्लीपर सेल्स’ को सक्रिय करने और महत्वपूर्ण रणनीतिक ठिकानों की टोह लेने के लिए कर रहा था।
- गिरफ्तारी का दायरा: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इन आरोपियों को पकड़ने के लिए पंजाब पुलिस के साथ मिलकर कई स्थानों पर छापेमारी की। गिरफ्तार किए गए 11 लोगों में से कुछ का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है।
सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी
इस भंडाफोड़ के बाद देशभर के संवेदनशील सैन्य क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गई है।
- प्रशासनिक सतर्कता: पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस मॉड्यूल ने अब तक कितनी गोपनीय जानकारी पाकिस्तान भेजी है और इनके नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं।
- टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग: सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि व्यावसायिक रूप से उपलब्ध सोलर कैमरों और इंटरनेट का उपयोग जिस तरह जासूसी के लिए किया जा रहा है, वह एक नई और गंभीर चुनौती है।





