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‘बाढ़ राहत के 100 करोड़ खा गई टीएमसी’: अमित शाह का ममता सरकार पर बड़ा हमला, गोरखा मुद्दे पर किया बड़ा वादा

कोलकाता/सिलीगुड़ी: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुँच गया है। चुनावी अभियान को धार देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक रैली को वीडियो संबोधन के माध्यम से संबोधित किया और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। शाह ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार ने उत्तर बंगाल में बाढ़ पीड़ितों के हक के करोड़ों रुपयों का गबन किया है।

भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार: ‘एक-एक पैसा करेंगे वसूल’

अमित शाह ने अपने संबोधन में केंद्र द्वारा भेजी गई सहायता राशि का जिक्र करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने उत्तर बंगाल में बाढ़ राहत कार्यों के लिए 100 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि आवंटित की थी।

  • घोटाले का आरोप: गृह मंत्री ने दावा किया कि यह पूरी राशि जनता तक पहुँचने के बजाय टीएमसी के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई।
  • कड़ी चेतावनी: उन्होंने बंगाल की जनता को आश्वस्त करते हुए कहा, “राज्य में भाजपा की सरकार बनते ही इस घोटाले की गहन जाँच की जाएगी और भ्रष्टाचारियों की जेब से जनता का एक-एक पैसा वापस वसूला जाएगा।”

गोरखा मुद्दे पर मास्टरस्ट्रोक: केस वापसी का एलान

उत्तर बंगाल की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने वाले गोरखा समुदाय को साधते हुए अमित शाह ने बड़ा चुनावी वादा किया। उन्होंने कहा कि दार्जिलिंग और आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय से लंबित गोरखा मुद्दे का समाधान भाजपा की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है।

  • मुकदमों की वापसी: उन्होंने घोषणा की कि यदि भाजपा सत्ता में आती है, तो आंदोलन के दौरान गोरखा नेताओं और कार्यकर्ताओं पर दर्ज किए गए सभी पुराने राजनीतिक मुकदमे वापस ले लिए जाएंगे।
  • स्थायी समाधान: शाह ने विश्वास दिलाया कि भाजपा ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो गोरखा समुदाय की आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए उनकी समस्याओं का स्थायी संवैधानिक समाधान निकाल सकती है।

बदलते चुनावी समीकरण

जैसे-जैसे मतदान की तारीखें नजदीक आ रही हैं, बंगाल में आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति तीखी होती जा रही है। अमित शाह के इस संबोधन ने उत्तर बंगाल की सीटों पर चुनावी मुकाबले को और अधिक रोचक बना दिया है। जहाँ एक ओर भाजपा विकास और भ्रष्टाचार मुक्त शासन का वादा कर रही है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय अस्मिता और दार्जिलिंग के मुद्दों को छेड़कर टीएमसी के वोट बैंक में सेंध लगाने की पुरजोर कोशिश कर रही है।

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