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तेलंगाना के सियासी रण में पिता के सामने खड़ी हुईं बेटी; के. कविता ने लॉन्च की ‘TRS’, केसीआर की BRS को देंगी कड़ी चुनौती

हैदराबाद/मेडचल: तेलंगाना की राजनीति में उस वक्त एक नया मोड़ आ गया जब पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बेटी और पूर्व एमएलसी कलवकुंतला कविता (K. Kavitha) ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी के गठन का आधिकारिक एलान कर दिया। ‘तेलंगाना राष्ट्र सेना’ (TRS) के नाम से लॉन्च की गई इस नई पार्टी के साथ ही कविता ने अपने पिता के नेतृत्व वाली ‘भारत राष्ट्र समिति’ (BRS) से अपना वर्षों पुराना नाता पूरी तरह तोड़ लिया है। इस कदम को राज्य की राजनीति में एक बड़े पारिवारिक और राजनीतिक विभाजन के रूप में देखा जा रहा है।

मुनीराबाद में शक्ति प्रदर्शन: झंडे और एजेंडे का अनावरण

पार्टी के लॉन्च के लिए मेडचल जिले के मुनीराबाद को चुना गया, जहाँ समर्थकों के हुजूम के बीच के. कविता ने अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत की।

  • पार्टी का स्वरूप: कार्यक्रम के दौरान कविता ने अपनी नई पार्टी ‘TRS’ के नाम, झंडे और भविष्य के एजेंडे का अनावरण किया।
  • नाम का महत्व: सूत्रों का कहना है कि कविता जानबूझकर ‘TRS’ नाम को वापस लाना चाहती थीं, क्योंकि यह नाम मूल रूप से तेलंगाना राज्य निर्माण के संघर्ष, पहचान और यहां के लोगों की भावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।

प्रोफेसर जयशंकर मैदान में उमड़ा समर्थकों का सैलाब

पार्टी लॉन्चिंग के इस भव्य कार्यक्रम को एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में आयोजित किया गया।

  • विशाल जनसमूह: तेलंगाना के सभी 33 जिलों से लगभग 50,000 समर्थक इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने मुनीराबाद पहुँचे।
  • आयोजन स्थल: यह कार्यक्रम 20 एकड़ में फैले एक विशाल मैदान में संपन्न हुआ, जिसका नाम तेलंगाना आंदोलन के वैचारिक स्तंभ रहे प्रोफेसर के. जयशंकर के नाम पर रखा गया था।

पिता की BRS से निर्णायक अलगाव

के. कविता का यह कदम उनके पिता केसीआर द्वारा पार्टी का नाम TRS से बदलकर BRS (भारत राष्ट्र समिति) करने के फैसले के विरोध के रूप में भी देखा जा रहा है।

  1. क्षेत्रीय अस्मिता पर जोर: कविता का मानना है कि राष्ट्रीय राजनीति के चक्कर में क्षेत्रीय मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनकी नई पार्टी मुख्य रूप से तेलंगाना-विशिष्ट समस्याओं और राज्य के विकास पर केंद्रित रहेगी।
  2. पारिवारिक कलह से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता: इस अलगाव ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले चुनावों में पिता और बेटी की पार्टियां एक-दूसरे के आमने-सामने होंगी, जिससे तेलंगाना का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।

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