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‘घर लौट आओ, भारत माता को आपकी ज़रूरत’: जोहो प्रमुख श्रीधर वेंबू की प्रवासी भारतीयों से भावुक अपील; स्वदेश आकर तकनीकी नेतृत्व देने का आह्वान

चेन्नई/नई दिल्ली: भारतीय बहुराष्ट्रीय सॉफ्टवेयर कंपनी ‘जोहो’ (Zoho) के सह-संस्थापक और प्रसिद्ध उद्यमी श्रीधर वेंबू ने विदेशों, विशेषकर अमेरिका में कार्यरत भारतीय पेशेवरों से एक भावुक अपील की है। सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक खुला पत्र साझा करते हुए वेंबू ने प्रवासी भारतीयों को भारत वापस लौटने और देश की तकनीकी क्षमता को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत की युवा आबादी को उस अनुभव और तकनीकी नेतृत्व की आवश्यकता है, जो इन पेशेवरों ने वर्षों की वैश्विक सेवा से अर्जित किया है।

भावुक खुला पत्र: “आपकी प्रतिभा की देश को ज़रूरत”

श्रीधर वेंबू ने अपने पत्र में भारतीय इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को रेखांकित किया।

  • स्वदेश वापसी का आह्वान: उन्होंने लिखा, “कृपया घर लौट आओ। भारत माता को आपकी प्रतिभा की ज़रूरत है।” उन्होंने प्रवासियों से आग्रह किया कि वे अपनी मातृभूमि की तकनीकी शक्ति को सशक्त बनाने में अपना योगदान दें।
  • युवाओं का मार्गदर्शन: वेंबू ने जोर देकर कहा कि भारत में युवाओं की एक विशाल आबादी है, जिसे सही दिशा और तकनीकी मार्गदर्शन की आवश्यकता है। उन्होंने प्रवासियों से अपील की कि वे अपने अनुभव का लाभ भारत के उभरते हुए स्टार्टअप्स और तकनीकी क्षेत्र को दें।

क्यों खास है श्रीधर वेंबू का व्यक्तित्व?

श्रीधर वेंबू केवल एक उद्यमी नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व हैं जिन्होंने खुद अमेरिका की चकाचौंध छोड़ भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में रहकर ‘जोहो’ को एक वैश्विक ब्रांड बनाया।

  • गूगल वर्कस्पेस का विकल्प: जोहो को आज कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और क्लाउड-आधारित बिजनेस टूल्स के क्षेत्र में गूगल वर्कस्पेस का सबसे मजबूत भारतीय विकल्प माना जाता है।
  • ग्रामीण विकास का मॉडल: वेंबू ने तमिलनाडु के ग्रामीण इलाकों में सॉफ्टवेयर हब बनाकर यह सिद्ध किया है कि प्रतिभा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है।

अपील के पीछे का समय: अमेरिका में बढ़ता दबाव

विशेषज्ञों का मानना है कि श्रीधर वेंबू की यह अपील एक ऐसे समय में आई है जब अमेरिका में भारतीय पेशेवरों के लिए स्थितियां चुनौतीपूर्ण हो रही हैं।

  1. H-1B वीजा पर संकट: अमेरिका में नई प्रशासनिक नीतियों और एच-1बी (H-1B) वीजा नियमों में संभावित सख्ती की आशंकाओं के बीच भारतीय आईटी पेशेवरों के मन में असुरक्षा की भावना बढ़ी है।
  2. अमेरिकी प्रशासन का दबाव: एच-1बी वीजा प्रोग्राम वर्तमान में अमेरिकी प्रशासन के कड़े रुख का सामना कर रहा है, जिससे कई भारतीयों को अपने भविष्य की चिंता सता रही है।

भारतीय तकनीकी क्षेत्र के लिए नए अवसर

वेंबू की इस अपील को भारतीय ‘रिवर्स ब्रेन ड्रेन’ (विदेशी प्रतिभा का स्वदेश लौटना) की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।

  • आर्थिक मजबूती: यदि अनुभवी पेशेवर भारत लौटते हैं, तो इससे न केवल नई तकनीक विकसित होगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और डिजिटल इंडिया अभियान को भी जबरदस्त मजबूती मिलेगी।
  • आत्मनिर्भर भारत: जोहो प्रमुख का यह संदेश ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना से ओतप्रोत है, जहाँ वे चाहते हैं कि भारतीय दिमाग भारत की समस्याओं का समाधान करने और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए यहीं काम करें।

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