राजनांदगांव: छत्तीसगढ़ का राजनांदगांव जिला और उससे सटे वनांचल क्षेत्र पिछले कुछ महीनों से ईसाई मिशनरियों की संदिग्ध गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं। स्थानीय सूत्रों और जांच एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार, जिले के मुख्यालय से लेकर दूर-दराज के गांवों तक मिशनरियों ने अपना एक व्यवस्थित नेटवर्क तैयार कर लिया है, जो भोले-भले ग्रामीणों को विभिन्न प्रलोभन देकर मतांतरण कराने में सक्रिय है। इस मामले में अंतरराष्ट्रीय संगठनों की संलिप्तता भी सामने आई है, जिसकी जांच अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की जा रही है।
अमेरिकी संगठन ‘टीटीआई’ और डेविड चाको का कनेक्शन
इस पूरे मामले में इस वर्ष मार्च महीने में हुई डेविड चाको नामक व्यक्ति की गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं।
- विदेशी फंडिंग का शक: जांच में पता चला है कि डेविड चाको अमेरिकी संगठन ‘द टिमोथी इनशिएटिव’ (TTI) से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ था।
- ईडी की जांच: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस बात की गहनता से पड़ताल कर रहा है कि इस संगठन के जरिए छत्तीसगढ़ में कितना फंड आया और उसका उपयोग किन गतिविधियों में किया गया। आशंका जताई जा रही है कि विदेशी धन का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर मतांतरण के ढांचे को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है।
महिलाओं को बनाया जा रहा मुख्य निशाना: वर्गीकृत रणनीति का खुलासा
आदिवासी समाज के वरिष्ठ नेता लाल लक्ष्मेंद्र शाह ने मिशनरियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
- प्रशिक्षित नेटवर्क: शाह के अनुसार, मोहला-मानपुर सहित पूरे प्रदेश में प्रशिक्षित लोगों की एक बड़ी टीम काम कर रही है। ये लोग गांवों में जाकर स्वास्थ्य, शिक्षा और दैवीय चमत्कार का झांसा देकर लोगों को प्रभावित करते हैं।
- रणनीति का वर्गीकरण: मिशनरियों ने धर्म, जाति और भौगोलिक क्षेत्रों के आधार पर अपनी रणनीति को वर्गीकृत किया है। उनके निशाने पर सबसे अधिक महिलाएं हैं, क्योंकि उन्हें प्रभावित कर पूरे परिवार को आसानी से अपने पक्ष में किया जा सकता है।
गांव-गांव में फैला सक्रिय नेटवर्क
प्रशासनिक और खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, मिशनरियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में गहरी पैठ बना ली है।
- मुख्यालय से गांवों तक: राजनांदगांव जिला मुख्यालय को केंद्र बनाकर आसपास के ग्रामीण अंचलों में मिशनरी अपनी गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं।
- सक्रियता में वृद्धि: पिछले कुछ महीनों में इन क्षेत्रों में प्रार्थना सभाओं और सामूहिक कार्यक्रमों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी देखी गई है, जिन्हें मतांतरण के प्राथमिक चरण के रूप में देखा जा रहा है।
स्थानीय समाज में आक्रोश और प्रशासनिक रुख
क्षेत्र के आदिवासी संगठनों और हिंदूवादी समूहों ने इन गतिविधियों का कड़ा विरोध शुरू कर दिया है।
- आदिवासी अस्मिता का सवाल: स्थानीय नेताओं का कहना है कि मतांतरण के कारण आदिवासियों की मूल संस्कृति और परंपराओं पर खतरा मंडरा रहा है।
- सुरक्षा बलों की निगरानी: बस्तर और राजनांदगांव के सीमावर्ती इलाकों में पुलिस और खुफिया विभाग को विशेष रूप से अलर्ट किया गया है ताकि किसी भी गैर-कानूनी गतिविधि या जबरन मतांतरण के प्रयासों को रोका जा सके।





