लाठियां खाईं, गोलियां झेलीं, फिर भी अधूरा रहा सपना; आंदोलनकारियों ने कहा—पहाड़ का दर्द समझे सरकार
हल्द्वानी। उत्तराखंड बना, लेकिन स्थायी राजधानी का सवाल आज भी अनसुलझा है। गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग को लेकर हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन जारी है। राज्य आंदोलन की यादें और अधूरे सपनों का दर्द लिए चखुटिया के आंदोलनकारी जगदीश मंगाई सोमवार को अनशन पर बैठे। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन के दौरान लाठियां खाईं, गोलियां झेलीं और खून से लथपथ आंदोलनकारियों को अपने हाथों से अस्पताल पहुंचाया। तब सपना था कि अपना राज्य बनेगा, हक-हकूक मिलेंगे और पहाड़ से पलायन रुकेगा, लेकिन आज राज्य की हालत देखकर आंदोलनकारियों की आत्मा दुखी है।
‘पहाड़ के अस्तित्व के लिए गैरसैंण जरूरी’
अनशन पर बैठे पूर्व आईएएस विनोद प्रसाद रतूड़ी ने कहा कि उत्तराखंड का निर्माण पहाड़ की अस्मिता, अस्तित्व और अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से हुआ था, लेकिन वर्षों बाद भी स्थायी राजधानी का फैसला नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि पहाड़ के खेत, किसान, गांव और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बचाने के लिए गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाना जरूरी है। राज्य आंदोलनकारियों और शहीदों के सपनों को अब और अधूरा नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
78 साल के आंदोलनकारी भी डटे
नंदप्रयाग से हल्द्वानी पहुंचे 78 वर्षीय राज्य आंदोलनकारी गोपाल दत्त कुमोड़ी 24 घंटे बुद्ध पार्क में तंबू के भीतर रहकर आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि गैरसैंण में विधानसभा भवन होने और ग्रीष्मकालीन राजधानी का दर्जा मिलने के बावजूद स्थायी राजधानी का प्रश्न लंबित है। उन्होंने आगामी गैरसैंण विधानसभा सत्र में सरकार से स्पष्ट और ठोस निर्णय लेने की मांग की।
कई जिलों के आंदोलनकारी पहुंचे हल्द्वानी
पहाड़ी आर्मी के संस्थापक हरीश रावत ने बताया कि टिहरी के अनिल बहुगुणा, चखुटिया के भुवन कठायत, गोचर के रमेश थपलियाल, रुद्रप्रयाग के सेवानिवृत्त इंजीनियर दयाल सिंह राणा, मासी के आनंद राम, चमोली के दुर्गा प्रसाद, ऋषिकेश के रामेश्वर शर्मा, गैरसैंण के नारायण सिंह बिष्ट और कर्णप्रयाग के दान सिंह मिगवाल समेत विभिन्न क्षेत्रों के लोग अनशन में शामिल हो चुके हैं। उनके अनुसार, प्रदेश के अलग-अलग जिलों से लोग समर्थन देने पहुंच रहे हैं। अन्य राज्यों में रहने वाले प्रवासी उत्तराखंडी भी आंदोलन से जुड़ने के लिए हल्द्वानी आ रहे हैं।
आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे समाजसेवी संतोष नेगी ने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में धरनास्थल पर पहुंचने की अपील की। उन्होंने कहा कि पलायन, रोजगार और पर्वतीय क्षेत्रों के विकास जैसे मुद्दों पर सभी वर्गों को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी।
इस दौरान पहाड़ी आर्मी के जिलाध्यक्ष फौजी राजेंद्र कांडपाल, प्रेमा मेर, नीमा भट्ट, मनोज रावत, जय रावत, अंजू पांडे, विनोद नेगी, संजय जोशी, संजय बिष्ट, हेम शर्मा, कविंद्र चंद, हिमांशु शर्मा, देवेंद्र सालाकोट, संजय वर्मा, करण संजय रौतेला और प्रदीप रौतेला समेत दर्जनों आंदोलनकारी मौजूद रहे।





