देहरादून। उत्तराखंड में वन्यजीवों की सुरक्षा और तस्करी रोकने की जिम्मेदारी संभालने वाले वन विभाग के कार्यालयों में ही हाथी दांतों का बड़ा भंडार जमा है। हैरानी की बात यह है कि केंद्र सरकार की ओर से वन्यजीवों के अंगों के निस्तारण के लिए वर्ष 2023 में नियम बनाए जाने के बावजूद तीन साल तक इन पर अमल नहीं हुआ। अब लैंसडौन वन प्रभाग के लालढांग रेंज कार्यालय से पांच हाथी दांत चोरी होने के बाद वन विभाग हरकत में आया है।
राजाजी और कॉर्बेट में सैकड़ों हाथी दांत
वन विभाग तस्करों से बरामद हाथी दांतों के अलावा प्राकृतिक रूप से मृत हाथियों और आपसी संघर्ष में मारे गए हाथियों के दांत भी अपने कार्यालयों में सुरक्षित रखता है। कई स्थानों पर ये दांत वर्षों से जमा हैं।
सूत्रों के अनुसार, राजाजी टाइगर रिजर्व के विभिन्न कार्यालयों में करीब 215 हाथी दांत रखे हैं। वहीं, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में भी 140 से अधिक हाथी दांत होने की जानकारी सामने आई है। इनमें कुछ मामले करीब ढाई दशक पुराने बताए जा रहे हैं।
लालढांग से पांच हाथी दांत चोरी होने के बाद खुली पोल
लैंसडौन वन प्रभाग की लालढांग रेंज के स्टोर में रखे 15 हाथी दांतों में से पांच चोरी हो गए। इनका कुल वजन करीब 35 किलोग्राम बताया गया है। घटना के बाद विभाग ने प्राथमिकी दर्ज कराई और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए। मामले की जांच में तस्करी के संभावित नेटवर्क के पहलू को भी शामिल किया गया है।
2023 के नियमों पर अब शुरू हुई कार्रवाई
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वर्ष 2023 में वन्यपशु वस्तु का वन्यजीव निपटान नियम लागू किया था। इसके तहत वन्यजीवों के अंगों के सत्यापन और निस्तारण के लिए समिति गठित करने का प्रावधान है। इसके बावजूद अब तक नियमों के अनुसार कार्रवाई नहीं हुई।
चोरी की घटना के बाद वन मुख्यालय ने सभी वन प्रभागों और टाइगर रिजर्व से हाथी दांतों का ब्योरा दो अलग-अलग प्रारूपों में मांगा है। इनमें न्यायालय से जुड़े और अन्य मामलों की जानकारी शामिल है। विवरण मिलने के बाद टीमों से भौतिक सत्यापन कराया जाएगा और समिति के माध्यम से नियमानुसार निस्तारण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
अपर प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव विवेक पांडे के अनुसार, सभी वन प्रभागों से जानकारी मांगी गई है। सूचना मिलने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।





