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अमेरिका को मिला पहला मुस्लिम सीनेटर, अब्दुल अल-सैयद ने मिशिगन में रचा इतिहास; पत्नी का भारत के भटकल से है नाता

वाशिंगटन। अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद ने मिशिगन से अमेरिकी सीनेट का चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया है। वह अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम सांसद बन गए हैं। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार और पूर्व सांसद माइक रोजर्स को हराया। उनकी इस जीत से अमेरिका ही नहीं, भारत के कर्नाटक स्थित भटकल में भी खुशी का माहौल है। इसकी वजह उनकी पत्नी का भारतीय परिवार से जुड़ाव है।

पत्नी का परिवार कर्नाटक के भटकल से जुड़ा

अब्दुल अल-सैयद की पत्नी डॉ. सारा जुकाकू पेशे से मनोचिकित्सक हैं। उनका परिवार कर्नाटक के तटीय शहर भटकल से ताल्लुक रखता है। यह स्थान मंगलुरु से करीब 140 किलोमीटर दूर है। सारा के दादा जुकाकू शमसुद्दीन मैसूर रियासत में तत्कालीन मुख्यमंत्री बीडी जत्ती के कार्यकाल में वित्त उपमंत्री रह चुके हैं। उन्होंने भटकल के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

सारा के पिता डॉ. जुकाकू एस. तैयब पेशे से नेफ्रोलॉजिस्ट हैं। वह बाद में अमेरिका में बस गए थे। सारा की मुलाकात अब्दुल अल-सैयद से मिशिगन विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान हुई थी। दोनों ने वर्ष 2006 में शादी की। दंपती की दो बेटियां हैं।

खुद को बताया भारतीय संस्कृति से जुड़ा

अब्दुल अल-सैयद ने एक इंटरव्यू में अपनी पत्नी के भारतीय परिवार और संस्कृति से जुड़ाव पर बात करते हुए कहा था कि दक्षिण भारतीय परिवार में शादी के बाद वह पिछले 20 वर्षों से इस संस्कृति का हिस्सा हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था कि शायद वह अरब से ज्यादा भारतीय हो गए हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं को बनाया चुनावी मुद्दा

42 वर्षीय अल-सैयद पेशे से डॉक्टर और जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ हैं। वह वेन काउंटी के स्वास्थ्य विभाग के निदेशक के रूप में भी काम कर चुके हैं। उनके चुनाव प्रचार का प्रमुख मुद्दा सभी नागरिकों के लिए सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं, महंगाई से राहत और राजनीति में कॉरपोरेट प्रभाव को कम करना रहा।

चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन नेताओं ने उन पर तीखे राजनीतिक हमले किए थे। हालांकि, तमाम विरोध के बावजूद उन्होंने मिशिगन में जीत दर्ज कर अमेरिकी राजनीति में नया इतिहास बना दिया।

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