तेहरान/वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु एवं क्षेत्रीय तनाव से जुड़ी कूटनीतिक बातचीत के बीच तेहरान ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पहले से तय समझौते (MoU) की सभी शर्तें पूरी नहीं की जातीं, तब तक किसी भी प्रकार की अंतिम वार्ता आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच बातचीत में कुछ प्रगति के संकेत मिल रहे थे, लेकिन अंतिम समझौते को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष और प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ ने कहा कि मौजूदा बातचीत का उद्देश्य केवल पहले से तय रूपरेखा को लागू करना है, न कि नया अंतिम समझौता करना। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका को अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करना होगा, तभी आगे की वार्ता संभव होगी।
ईरानी पक्ष का कहना है कि समझौते के कई महत्वपूर्ण प्रावधान—जैसे प्रतिबंधों में राहत, वित्तीय संपत्तियों की रिहाई और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े कदम—अभी तक पूरी तरह लागू नहीं किए गए हैं। तेहरान का यह भी कहना है कि जब तक ये शर्तें पूरी नहीं होतीं, किसी भी तरह की “फाइनल डील” पर बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी।
वहीं, अमेरिकी पक्ष की ओर से संकेत दिए गए हैं कि बातचीत जारी है, लेकिन यह प्रक्रिया चरणबद्ध और शर्तों पर आधारित होगी। अमेरिका का रुख है कि ईरान को समझौते के तहत तय किए गए मानकों को पूरा करना होगा, तभी आगे आर्थिक या कूटनीतिक रियायतें दी जाएंगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बयान दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव को और बढ़ा सकता है। हाल के महीनों में ईरान-अमेरिका संबंधों में कई बार बातचीत हुई है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय प्रभाव जैसे मुद्दों पर मतभेद अब भी बरकरार हैं।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा स्थिति में दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं, जिससे किसी बड़े समझौते की संभावना फिलहाल कमजोर दिखाई दे रही है।
इस बीच, वैश्विक बाजार और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर भी इन तनावों का असर देखने को मिल रहा है। कूटनीतिक हलकों की नजर अब इस बात पर है कि क्या आने वाले दिनों में दोनों देश किसी मध्यस्थता के जरिए बातचीत को आगे बढ़ा पाते हैं या नहीं।
फिलहाल स्थिति यह है कि ईरान ने स्पष्ट कर दिया है—“पहले शर्तें, फिर समझौता।”





