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मध्य पूर्व में युद्ध की रिपोर्टिंग के दौरान भीषण त्रासदी: इजरायली हमले में लेबनानी पत्रकार अमल खलील की मौत; 4 घंटे तक मलबे में दबा रहा शव

बेरूत/यरूशलेम: मध्य पूर्व में जारी भीषण संघर्ष के बीच एक बार फिर पत्रकारिता जगत के लिए काली खबर सामने आई है। दक्षिणी लेबनान में बुधवार को इजरायली हवाई हमले की चपेट में आने से 43 वर्षीय लेबनानी पत्रकार अमल खलील की दर्दनाक मृत्यु हो गई। लेबनानी सैन्य अधिकारियों और खलील के समाचार संस्थान ‘अल-अखबार’ ने इस घटना की पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि हमले के बाद अमल खलील का शव लगभग चार घंटे तक मलबे में दबा रहा, जिसे काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला जा सका।

दक्षिणी लेबनान में हमले का शिकार हुई पत्रकार

अमल खलील, जो लेबनानी समाचार पत्र ‘अल-अखबार’ के लिए कार्यरत थीं, सीमावर्ती इलाकों में चल रही सैन्य गतिविधियों की रिपोर्टिंग कर रही थीं।

  • हमले का विवरण: एक वरिष्ठ लेबनानी सैन्य अधिकारी के अनुसार, इजरायली सेना द्वारा दक्षिणी लेबनान के रिहायशी और रणनीतिक ठिकानों पर किए गए हमलों के दौरान खलील इसकी चपेट में आ गईं।
  • साथी फोटोग्राफर घायल: इस हमले के समय खलील के साथ एक फोटोग्राफर भी मौजूद था, जो हमले में गंभीर रूप से घायल हो गया है। उसे इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

लेबनान में पत्रकारों की बढ़ती मौतें

अमल खलील की मृत्यु के साथ ही, जारी युद्ध की रिपोर्टिंग के दौरान लेबनान में जान गंवाने वाले पत्रकारों की कुल संख्या अब बढ़कर पाँच हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों ने युद्ध क्षेत्र में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है।

  • सुरक्षा पर सवाल: प्रेस सुरक्षा संगठनों का आरोप है कि स्पष्ट पहचान (Press जैकेट और हेलमेट) होने के बावजूद मीडिया कर्मियों को निशाना बनाया जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन है।

इजरायली सेना की प्रतिक्रिया

इस विशिष्ट घटना और अमल खलील की मौत पर इजरायली रक्षा बल (IDF) की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक या सीधी टिप्पणी सामने नहीं आई है।

  • पूर्व का बयान: हालांकि, इससे पहले जारी एक संक्षिप्त बयान में इजरायली सेना ने केवल इतना कहा था कि उन्हें ऐसी रिपोर्टें मिली हैं कि उनके हमलों के परिणामस्वरूप दो पत्रकार घायल हुए हैं। सेना ने जानबूझकर किसी पत्रकार को निशाना बनाने के आरोपों से इनकार किया है।

मीडिया जगत में शोक और आक्रोश

अमल खलील के संस्थान ‘अल-अखबार’ ने अपनी रिपोर्टर को श्रद्धांजलि देते हुए इसे ‘सत्य की आवाज को दबाने की कोशिश’ करार दिया है।

  1. मलबे से बरामदगी: बचाव दल को खलील तक पहुँचने में चार घंटे का समय लगा, क्योंकि लगातार हो रही गोलाबारी के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधा आ रही थी।
  2. जांच की मांग: लेबनान सरकार और स्थानीय प्रेस क्लब ने इस मामले की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि युद्ध अपराधों के लिए जवाबदेही तय हो।

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