नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित आईसीएआर पूसा में एमएस स्वामीनाथन शताब्दी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि किसानों का हित भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सरकार किसानों, मछुआरों और डेयरी किसानों के हितों से कभी समझौता नहीं करेगी।
सम्मेलन का विषय “सदाबहार क्रांति – जैव-खुशी का मार्ग” था, जो स्वर्गीय प्रो. एम.एस. स्वामीनाथन के खाद्य सुरक्षा और कृषि क्षेत्र में आजीवन योगदान को समर्पित है।
स्वामीनाथन को मां भारती का सपूत बताया
प्रधानमंत्री ने स्वामीनाथन को “मां भारती का सपूत” बताते हुए कहा कि उनका योगदान किसी एक कालखंड तक सीमित नहीं है। उन्होंने विज्ञान को जन सेवा का माध्यम बनाया और ऐसी चेतना जगाई जो आने वाली पीढ़ियों को दिशा देती रहेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया व्यक्तिगत जुड़ाव
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका प्रो. स्वामीनाथन से जुड़ाव वर्षों पुराना रहा है। गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान जब राज्य सूखा और चक्रवात से जूझ रहा था, तब मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना पर स्वामीनाथन ने न केवल रुचि दिखाई, बल्कि सक्रिय मार्गदर्शन भी दिया, जिससे योजना को उल्लेखनीय सफलता मिली।
स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी
इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने प्रो. स्वामीनाथन के सम्मान में एक स्मारक सिक्का और डाक टिकट भी जारी किया।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की भी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बीते 10 वर्षों में देश के हथकरघा क्षेत्र को नई पहचान और ताकत मिली है।
सम्मेलन 7 से 9 अगस्त तक
तीन दिवसीय यह सम्मेलन 7 से 9 अगस्त तक चलेगा। इसका आयोजन एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन (एमएसएसआरएफ), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।





