नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कहा है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है। राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि मजबूत घरेलू मांग, स्वस्थ कॉरपोरेट बैलेंस शीट, वित्तीय अनुशासन और व्यापक आर्थिक स्थिरता के कारण भारत वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर रहा है।
सरकार के अनुसार, देश की आर्थिक मजबूती का आधार बढ़ता निवेश, बैंकिंग क्षेत्र की सुदृढ़ स्थिति, पूंजीगत व्यय में वृद्धि और संरचनात्मक सुधार हैं। इन कारणों से भारत की विकास दर को निरंतर समर्थन मिल रहा है। सरकार का कहना है कि आर्थिक गतिविधियों में तेजी और घरेलू उपभोग में मजबूती से विकास की गति बनी हुई है।
राज्यमंत्री ने बताया कि सरकार महंगाई को नियंत्रित रखने, वित्तीय घाटे को संतुलित करने और बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। साथ ही उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) जैसी योजनाओं और विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने वाले कदमों से निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।
सरकार ने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, अंतरराष्ट्रीय संघर्ष और व्यापारिक अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था का व्यापक आर्थिक ढांचा इन परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम है। घरेलू मांग और वित्तीय क्षेत्र की मजबूती देश की अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान कर रही है।
हाल ही में जारी औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े भी आर्थिक गतिविधियों में तेजी का संकेत देते हैं। जून में औद्योगिक उत्पादन 7.3 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जो लगभग दो वर्षों में सबसे तेज वृद्धि मानी जा रही है। विनिर्माण और बिजली क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन ने इस वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
सरकार का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता के अनुसार नीतिगत कदम उठाए जाएंगे, ताकि भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार और व्यापक आर्थिक स्थिरता आगे भी बनी रहे।





