नई दिल्ली/रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महादेव ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क को लेकर बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया है कि पिछले सात वर्षों में इस अवैध सट्टेबाजी सिंडिकेट और इससे जुड़े प्लेटफॉर्मों ने करीब 43 हजार करोड़ रुपये की अपराध आय (Proceeds of Crime) अर्जित की। जांच एजेंसी के अनुसार, यह अब तक का सबसे व्यापक आकलन है, जिससे देश में ऑनलाइन अवैध सट्टेबाजी के विशाल नेटवर्क का पता चलता है।
ईडी ने यह अनुमान धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दायर अपनी अनंतिम कुर्की आदेश में दर्ज किया है। यह आदेश दिल्ली के कारोबारी विकास गर्ग से जुड़ी लगभग 940.77 करोड़ रुपये की संपत्तियों के मामले में जारी किया गया था। एजेंसी का आरोप है कि इन संपत्तियों की खरीद अवैध सट्टेबाजी से अर्जित धन को वैध बनाकर की गई।
जांच के मुताबिक, दुबई से संचालित महादेव ऑनलाइन बुक नेटवर्क फ्रेंचाइजी मॉडल पर काम करता था। देशभर में दो हजार से अधिक सक्रिय बेटिंग प्लेटफॉर्म इसके नेटवर्क से जुड़े थे। प्रत्येक प्लेटफॉर्म से हर महीने लाखों रुपये का मुनाफा होता था, जिसका बड़ा हिस्सा दुबई स्थित संचालकों तक पहुंचाया जाता था। अवैध कमाई को छिपाने के लिए शेल कंपनियों, फर्जी लेनदेन और हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता था।
ईडी ने बताया कि महादेव नेटवर्क के अलावा स्काईएक्सचेंज, लोटस365 और अन्य संबद्ध प्लेटफॉर्म भी इस पूरे नेटवर्क का हिस्सा थे। एजेंसी के अनुसार, कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई के बावजूद संचालक मिरर वेबसाइट और डमी प्लेटफॉर्म के जरिए अपना कारोबार जारी रखते रहे। अब तक इस मामले में 74 व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ पांच आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं।
जांच एजेंसी का कहना है कि यह मामला देश में ऑनलाइन अवैध सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े सबसे बड़े मामलों में शामिल है। ईडी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य वित्तीय लेनदेन, विदेशी निवेश और सहयोगियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। एजेंसी का मानना है कि आगे की जांच में इस सिंडिकेट से जुड़े कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।





