वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के बाद पहली बार आमने-सामने मुलाकात की। व्हाइट हाउस में हुई इस बैठक में दोनों नेताओं ने ईरान, मध्य-पूर्व की सुरक्षा स्थिति, गाजा और क्षेत्रीय कूटनीति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
बैठक ऐसे समय हुई है जब ईरान को लेकर अमेरिका और इजरायल की रणनीतियों में कुछ मतभेद सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, नेतन्याहू ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को लेकर सख्त रुख बनाए रखने के पक्ष में हैं, जबकि ट्रंप प्रशासन कूटनीतिक विकल्पों पर भी जोर दे रहा है।
व्हाइट हाउस की ओर से बैठक को सकारात्मक और रचनात्मक बताया गया। करीब डेढ़ घंटे चली बंद कमरे की बातचीत में दोनों नेताओं ने ईरान के साथ चल रहे तनाव, क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोगी देशों के साथ संबंधों पर विचार-विमर्श किया।
मुलाकात से पहले ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ बातचीत में प्रगति के संकेत मिले हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर अमेरिका अपने हितों की रक्षा के लिए कड़े कदम उठा सकता है। वहीं, नेतन्याहू का जोर ईरान की सैन्य क्षमताओं को सीमित करने और इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर रहा।
यह बैठक दोनों नेताओं के रिश्तों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हाल के दिनों में ईरान नीति और क्षेत्रीय संघर्षों को लेकर दोनों देशों के दृष्टिकोण में अंतर की खबरें आई थीं। इसके बावजूद अमेरिका और इजरायल ने रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाए रखने का संकेत दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप-नेतन्याहू वार्ता का असर आने वाले दिनों में मध्य-पूर्व की कूटनीतिक दिशा पर पड़ सकता है। ईरान के साथ संभावित बातचीत, सैन्य विकल्प और गाजा सहित अन्य क्षेत्रीय मुद्दों पर अमेरिका और इजरायल की नीति इस बैठक के बाद और स्पष्ट हो सकती है।
इस मुलाकात को ईरान संकट के बीच अमेरिका-इजरायल संबंधों को संतुलित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देशों की आगे की रणनीति पर वैश्विक समुदाय की नजर बनी हुई है।





