नई दिल्ली। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों, विशेषकर युवाओं से भारतीय हथकरघा उत्पादों को अपनाने और स्थानीय बुनकरों का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा केवल वस्त्र निर्माण की कला नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत और लाखों परिवारों की आजीविका का आधार भी है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि जिस उत्साह के साथ युवा फ्रेंडशिप डे जैसे अवसर मनाते हैं, उसी उत्साह के साथ राष्ट्रीय हथकरघा दिवस भी मनाया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से हैंडलूम परिधान पहनने, स्थानीय उत्पाद खरीदने और सोशल मीडिया पर उनके साथ अपने अनुभव साझा करने का आग्रह किया।
पीएम मोदी ने कहा कि देश के बुनकर अपनी मेहनत और कौशल से भारतीय संस्कृति को जीवंत बनाए हुए हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह स्वदेशी हथकरघा उत्पादों को प्राथमिकता देकर इन कारीगरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में योगदान दे।
उन्होंने युवाओं से ‘गेट रेडी विद मी’ (GRWM) जैसे लोकप्रिय सोशल मीडिया ट्रेंड के माध्यम से हैंडलूम परिधानों को बढ़ावा देने की भी अपील की। उनका कहना था कि आधुनिक डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर पारंपरिक भारतीय बुनाई को नई पहचान दी जा सकती है और इसे वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि “वोकल फॉर लोकल” और “आत्मनिर्भर भारत” की भावना को मजबूत करने में हथकरघा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। स्थानीय उत्पादों की बढ़ती मांग से न केवल बुनकरों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि भारत की पारंपरिक कला और शिल्प को भी नई ऊर्जा मिलेगी।
हर वर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य देश के बुनकरों के योगदान का सम्मान करना, हथकरघा उद्योग के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को स्वदेशी वस्त्रों के उपयोग के लिए प्रेरित करना है।





