नई दिल्ली। संसद परिसर में राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा गबन मामले को लेकर विपक्ष के विरोध प्रदर्शन पर सियासी विवाद गहरा गया है। भाजपा ने विपक्ष के प्रदर्शन को सनातन आस्था और करोड़ों राम भक्तों की भावनाओं का अपमान बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है भाजपा नेताओं का कहना है कि भ्रष्टाचार के आरोपों की आड़ में विपक्ष ने जिस प्रकार राम मंदिर और उससे जुड़े प्रतीकों का इस्तेमाल किया, वह अनुचित है। पार्टी का आरोप है कि इस तरह के प्रदर्शन से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और यह राजनीतिक लाभ के लिए आस्था का मजाक उड़ाने जैसा है। भाजपा ने कहा कि भगवान राम और राम मंदिर करोड़ों लोगों की श्रद्धा के केंद्र हैं, इसलिए उन्हें राजनीतिक विवाद का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
विपक्षी दलों ने संसद परिसर में सांकेतिक प्रदर्शन करते हुए राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे के कथित गबन की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान कुछ सांसदों ने सांकेतिक नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से सरकार पर सवाल खड़े किए और मामले में पारदर्शिता की मांग की।
भाजपा ने विपक्ष के इस प्रदर्शन को राजनीतिक नाटक करार देते हुए कहा कि जांच प्रक्रिया पहले से जारी है और बिना तथ्यों के धार्मिक प्रतीकों का उपयोग करना उचित नहीं है। पार्टी नेताओं ने कहा कि इस प्रकार के विरोध से सनातन धर्म में आस्था रखने वाले लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है और विपक्ष को इसके लिए देश से माफी मांगनी चाहिए।
उधर, विपक्ष का कहना है कि उनका विरोध किसी धार्मिक आस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि चढ़ावे के कथित दुरुपयोग के आरोपों को लेकर जवाबदेही तय कराने के उद्देश्य से था। विपक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग दोहराई है। इस मुद्दे को लेकर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।





