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सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामला: 22 आरोपियों की बरी के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

नई दिल्ली। सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 22 आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई है। शीर्ष अदालत ने मामले में सीबीआई और सभी बरी आरोपियों को नोटिस जारी किया है। याचिका सोहराबुद्दीन के भाई नायबुद्दीन शेख ने दाखिल की है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह बरी किए जाने के फैसले से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण गवाहों के बयानों की जांच करना चाहती है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड मंगाने के बजाय ऐसे तीन-चार गवाहों के बयान उपलब्ध कराए जाएं, जो मामले के फैसले के लिए महत्वपूर्ण हैं।

92 गवाहों के मुकरने पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस तथ्य पर विशेष ध्यान दिया कि मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष के 92 गवाह अपने बयानों से मुकर गए थे। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि इतने गवाहों के पक्ष बदलने का तथ्य इस बात पर विचार करने की जरूरत पैदा करता है कि मुकदमा निष्पक्ष और न्यायपूर्ण तरीके से चला या नहीं।

हाई कोर्ट ने बरकरार रखी थी बरी करने की कार्रवाई

बॉम्बे हाई कोर्ट ने 7 मई 2026 को विशेष सीबीआई अदालत के दिसंबर 2018 के फैसले को बरकरार रखा था। विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में 22 आरोपियों को बरी किया था। इनमें 21 पुलिस अधिकारी और एक फार्महाउस का मालिक शामिल था। हाई कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष सोहराबुद्दीन और उनकी पत्नी कौसर बी के कथित अपहरण तथा फर्जी एनकाउंटर की साजिश को पर्याप्त सबूतों से साबित नहीं कर सका।

क्या है मामला

सीबीआई के अनुसार, नवंबर 2005 में सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और उनके सहयोगी तुलसीराम प्रजापति से जुड़ी घटनाओं में पुलिस की भूमिका पर गंभीर आरोप लगे थे। सोहराबुद्दीन की 26 नवंबर 2005 को अहमदाबाद के पास पुलिस मुठभेड़ में मौत हुई थी। कौसर बी की भी कुछ दिनों बाद मौत हो गई थी, जबकि प्रजापति की दिसंबर 2006 में पुलिस मुठभेड़ में मौत हुई थी।

अब सुप्रीम कोर्ट गवाहों के बयानों और हाई कोर्ट के फैसले में उठाए गए पहलुओं की जांच करेगा।

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