नई दिल्ली। रक्षा तकनीक और “मेक इन इंडिया” को लेकर चल रही वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच एक बड़ा विवाद सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली कंपनी द्वारा विकसित एक रॉकेट प्रणाली ‘सूर्यास्त्र’ के परीक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दावा किया जा रहा है कि परीक्षण के दौरान यह रॉकेट करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर ही विफल हो गया, जिससे इसकी तकनीकी क्षमता और विश्वसनीयता पर संदेह बढ़ गया है।
सूत्रों के मुताबिक, इस परियोजना को लेकर पहले ही “मेक इन इंडिया” अभियान पर टिप्पणी और तंज जैसी बयानबाजी सामने आई थी, जिसके बाद यह मामला और अधिक संवेदनशील बन गया है। अब परीक्षण में कथित विफलता ने बहस को और तेज कर दिया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि परीक्षण के दौरान रॉकेट ने शुरुआती चरण में सामान्य प्रदर्शन किया, लेकिन निर्धारित दूरी पर पहुंचने से पहले ही तकनीकी खराबी के कारण उसका नियंत्रण प्रभावित हो गया। इसके बाद सिस्टम अपने लक्ष्य तक पहुंचने में असफल रहा।
हालांकि, इस पूरे मामले पर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है और न ही स्वतंत्र रूप से इन दावों की पुष्टि हुई है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी मिसाइल या रॉकेट प्रणाली के परीक्षण में कई चरण होते हैं और शुरुआती विफलताओं के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी हो सकती है।
इसी बीच, इस मुद्दे ने रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक बनाम विदेशी सहयोग की बहस को फिर से हवा दे दी है। “मेक इन इंडिया” अभियान के तहत भारत लगातार रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसमें कई घरेलू और संयुक्त परियोजनाएं शामिल हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक मिसाइल तकनीक बेहद जटिल होती है और परीक्षण के दौरान सुधार की प्रक्रिया सामान्य मानी जाती है। ऐसे में किसी एक परीक्षण को पूरी प्रणाली की असफलता के रूप में देखना तकनीकी दृष्टि से सही नहीं होगा।
फिलहाल इस मामले को लेकर आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार किया जा रहा है, जबकि रक्षा क्षेत्र में इस खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा जरूर तेज कर दी है।





