पेरिस/एवियन–ले–बैं (फ्रांस), एजेंसी। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में चीन की बढ़ती पकड़ को कम करने के लिए जी7 देशों ने एक अहम रणनीतिक समझौता किया है। फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने “क्रिटिकल मिनरल्स एलायंस” बनाने पर सहमति जताई है, जिसका उद्देश्य लिथियम, निकेल, रेयर अर्थ जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति में चीन पर निर्भरता घटाना है।
जी7 नेताओं ने स्वीकार किया कि रक्षा, इलेक्ट्रिक वाहनों, सेमीकंडक्टर और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के लिए आवश्यक इन खनिजों की सप्लाई चेन अत्यधिक केंद्रीकृत है, जिसमें चीन की भूमिका सबसे बड़ी है। हाल के वर्षों में चीन द्वारा निर्यात प्रतिबंध और बाजार नियंत्रण ने पश्चिमी देशों की आपूर्ति व्यवस्था को अस्थिर किया है।
नई योजना के तहत जी7 देश 2030 तक यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि किसी एक देश की हिस्सेदारी उनकी महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति में 60 प्रतिशत से अधिक न हो। इसके बाद इस सीमा को और घटाकर 50 प्रतिशत तक लाने की भी योजना है। इसके लिए देशों के बीच संयुक्त स्टॉकपाइलिंग, रीसाइक्लिंग क्षमता बढ़ाने और खनिज उत्पादन को विविध देशों में फैलाने पर जोर दिया जाएगा।
इसके अलावा, जी7 एक नया समन्वय मंच (प्लेटफॉर्म) भी स्थापित करेगा, जो अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के सहयोग से काम करेगा। यह प्लेटफॉर्म बाजार की निगरानी करेगा, आपूर्ति में संभावित संकट की चेतावनी देगा और देशों को त्वरित प्रतिक्रिया में मदद करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वैश्विक भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जहां ऊर्जा संक्रमण और तकनीकी विकास के लिए जरूरी संसाधनों पर नियंत्रण को लेकर बड़ी शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है।
हालांकि, इस योजना को लागू करना आसान नहीं होगा, क्योंकि वर्तमान में कई महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण और रिफाइनिंग पर चीन का लगभग एकाधिकार बना हुआ है।
जी7 नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी देश को अलग-थलग करना नहीं, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित, विविध और स्थिर बनाना है।




