नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल विस्तार और साइबर खतरों के बीच साइबर सुरक्षा क्षेत्र में प्रशिक्षित एवं कुशल पेशेवरों की भारी कमी सामने आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ साइबर हमलों की संख्या और जटिलता लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके मुकाबले योग्य साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की उपलब्धता बेहद सीमित है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी संस्थानों, निजी कंपनियों, बैंकिंग, स्वास्थ्य, दूरसंचार और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसके बावजूद उद्योग की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार नहीं हो पा रहे हैं, जिससे संगठनों के सामने सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बढ़ रही हैं।
जानकारों का मानना है कि केवल तकनीकी ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नेटवर्क सुरक्षा, एथिकल हैकिंग, डिजिटल फोरेंसिक, क्लाउड सिक्योरिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सुरक्षा समाधान और जोखिम प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले पेशेवरों की आवश्यकता है। वर्तमान समय में इन कौशलों से लैस युवाओं की संख्या अपेक्षाकृत कम है।
विशेषज्ञों ने कहा कि इस कमी को दूर करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है। पाठ्यक्रमों को उद्योग की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने, व्यावहारिक प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। उनका मानना है कि इससे युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे और उद्योग को प्रशिक्षित पेशेवर उपलब्ध हो सकेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि साइबर सुरक्षा अब केवल आईटी क्षेत्र तक सीमित विषय नहीं रह गया है। डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के कारण प्रत्येक संस्थान के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य हो गई है। ऐसे में आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं और अधिक बढ़ेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते कौशल विकास पर पर्याप्त निवेश नहीं किया गया तो साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की कमी देश की डिजिटल प्रगति के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।





