नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और उससे जुड़े संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) की ओर से राजनीतिक कार्यकर्ताओं और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को निशाना बनाने की साजिश रचे जाने की आशंका जताई गई है। खुफिया एजेंसियों के इनपुट के बाद सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, आतंकी संगठन घाटी में भय का माहौल बनाने और राजनीतिक गतिविधियों को प्रभावित करने के उद्देश्य से लक्षित हमलों की योजना बना रहे हैं। खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकियों की नजर विशेष रूप से राजनीतिक दलों से जुड़े कार्यकर्ताओं और अल्पसंख्यक समुदाय के नागरिकों पर हो सकती है।
इनपुट मिलने के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने संयुक्त रूप से निगरानी और तलाशी अभियान तेज कर दिए हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है, जबकि राजनीतिक नेताओं और संवेदनशील व्यक्तियों की सुरक्षा की भी समीक्षा की जा रही है।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन घाटी में शांति और सामान्य जनजीवन को बाधित करने के लिए इस तरह की साजिशें रच रहे हैं। हाल के महीनों में आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान कई आतंकियों के मारे जाने और उनके नेटवर्क को नुकसान पहुंचने के बाद संगठन नए तरीकों से अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रशासन ने आम नागरिकों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को देने की अपील की है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी आतंकी साजिश को विफल करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं तथा घाटी में शांति और सुरक्षा बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।





