नई दिल्ली। डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते दायरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े कानून में बड़ा बदलाव करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल-2026 पेश किया, जिसका उद्देश्य 1891 के ब्रिटिशकालीन कानून की जगह आधुनिक और तकनीक आधारित कानूनी व्यवस्था लागू करना है।
प्रस्तावित विधेयक के अनुसार अब बैंकों के डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक, वर्चुअल और क्लाउड आधारित रिकॉर्ड भी अदालतों में वैध साक्ष्य के रूप में स्वीकार किए जा सकेंगे। इससे बैंकिंग दस्तावेजों को प्रमाणित करने की प्रक्रिया अधिक सरल और समयानुकूल बनने की उम्मीद है।
सरकार का कहना है कि मौजूदा बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891 उस समय बनाया गया था जब बैंकिंग रिकॉर्ड मुख्य रूप से कागजी स्वरूप में रखे जाते थे। अब अधिकांश बैंक डिजिटल माध्यम से रिकॉर्ड तैयार और सुरक्षित रखते हैं, इसलिए कानून को भी नई तकनीक के अनुरूप बनाना आवश्यक हो गया है।
विधेयक में बैंक रिकॉर्ड की परिभाषा का दायरा बढ़ाकर सभी प्रकार के रिकॉर्ड—भौतिक, डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक, वर्चुअल और क्लाउड आधारित—को शामिल करने का प्रस्ताव है। साथ ही दस्तावेजों के प्रमाणीकरण के लिए मैनुअल, डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर की व्यवस्था भी की गई है। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को अदालत में भौतिक या डिजिटल दोनों रूपों में प्रस्तुत करने की अनुमति होगी।
बिल में केंद्र सरकार को यह अधिकार देने का भी प्रस्ताव है कि वह आवश्यक शर्तों के साथ इस कानून का दायरा अन्य वित्तीय संस्थाओं तक भी बढ़ा सके। वहीं, अदालत किन विशेष परिस्थितियों में बैंक अधिकारी को मूल रिकॉर्ड प्रस्तुत करने या गवाही के लिए बुला सकती है, इसे भी स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
सरकार का मानना है कि नया कानून न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था के अनुरूप बनाएगा। इसके लागू होने से बैंकिंग विवादों और अन्य कानूनी मामलों में डिजिटल रिकॉर्ड की स्वीकार्यता बढ़ेगी तथा मामलों के निस्तारण में तेजी आने की संभावना है।





