नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिका में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के दौरान मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की गई है। याचिका में SIR के दौरान करीब 13 करोड़ नाम मतदाता सूचियों से हटाए जाने के दावे की जांच की मांग भी की गई है।
यह याचिका अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल की है। इसमें मांग की गई है कि ऐसे फैसलों, दिशानिर्देशों और सॉफ्टवेयर बदलावों को निरस्त किया जाए, जो याचिकाकर्ता के अनुसार अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना किए गए। याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार समेत कुछ अधिकारियों के खिलाफ जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत कार्रवाई की मांग भी की गई है।
14 मौकों पर आपत्ति का दावा
याचिका में द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 मौकों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाली, फॉर्म-6 में बदलाव तथा चुनावी रोल के डेटा प्रबंधन से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं।
याचिका के अनुसार मई 2026 में फॉर्म-6 में किए गए बदलाव को लेकर भी आपत्ति दर्ज की गई थी। इसमें यह तर्क दिया गया कि मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 में आवश्यक संशोधन के बिना निर्धारित कानूनी फॉर्म में बदलाव नहीं किया जा सकता।
SIT से डेटा की जांच की मांग
याचिकाकर्ता ने प्रस्ताव दिया है कि सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग या SIT गठित की जाए। इसके जरिए ECINet और ERONet से जुड़े डेटाबेस का फोरेंसिक ऑडिट कराने तथा SIR के दौरान मतदाता नामों को हटाए जाने की परिस्थितियों की जांच की मांग की गई है।
याचिका में मूल वैधानिक फॉर्म-6 को बहाल करने और चुनावी डेटा से जुड़े सर्वर लॉग, डेटाबेस तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग भी शामिल है।
हालांकि, यह सभी आरोप और मांगें याचिका में किए गए दावों पर आधारित हैं। चुनाव आयोग का पक्ष है कि आयोग के निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे और आंतरिक टिप्पणियां बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था की सामान्य deliberation प्रक्रिया का हिस्सा हैं।




