कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान आयोग द्वारा लिए गए निर्णय कानून के दायरे में थे और उनमें न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग के विभिन्न फैसलों के खिलाफ हाई कोर्ट में कुल 110 याचिकाएं दायर की गई थीं। इनमें मतदाता सूची, मतदान प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था, मतदान केंद्रों के प्रबंधन, चुनाव अधिकारियों की नियुक्ति और अन्य प्रशासनिक निर्णयों को लेकर आपत्तियां उठाई गई थीं। हालांकि, सभी मामलों की सुनवाई के बाद अदालत ने आयोग के किसी भी निर्णय को अवैध नहीं माना।
हाई कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए उसे व्यापक अधिकार प्राप्त हैं। अदालत ने माना कि चुनाव के दौरान आयोग ने अपने अधिकारों का प्रयोग कानून के अनुरूप किया और ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया, जिसमें न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता हो।
निर्णय के बाद निर्वाचन आयोग को बड़ी राहत मिली है। अदालत के इस फैसले को चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और आयोग की संवैधानिक भूमिका के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। चुनाव से जुड़े मामलों में न्यायालय के इस रुख से भविष्य में भी आयोग के अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्ट संदेश गया है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान मतदान और मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली थी। कई पक्षों ने चुनाव आयोग के निर्णयों पर सवाल उठाते हुए न्यायालय का रुख किया था। हालांकि, हाई कोर्ट के ताजा फैसले के बाद इन सभी याचिकाओं का निपटारा हो गया है और आयोग की कार्रवाई को न्यायिक स्वीकृति मिल गई है।





