देहरादून। उत्तराखंड में मदरसों को अल्पसंख्यक विद्यालय के रूप में मान्यता देने की प्रक्रिया में अब तक 60 संस्थानों को मंजूरी मिल चुकी है। शिक्षा विभाग के पोर्टल पर मान्यता के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर को समाप्त हो गई। तीन महीने की प्रक्रिया में विभाग को कुल 198 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 138 आवेदन अभी लंबित हैं।
उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को एक जुलाई 2026 से समाप्त कर उसके स्थान पर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया था। इसके बाद मदरसों को नई व्यवस्था के तहत अल्पसंख्यक विद्यालय के रूप में मान्यता लेने के लिए आवेदन करना था।
35 संस्थानों को मिल चुका प्रमाणपत्र
अब तक मान्यता प्राप्त 60 संस्थानों में से 35 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी प्रमाणपत्र प्रदान कर चुके हैं, जबकि 25 अन्य संस्थानों को प्रमाणपत्र देने की प्रक्रिया चल रही है। उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रो. सुरजीत सिंह गांधी ने शासन को सौंपी रिपोर्ट में लंबित आवेदनों की प्रक्रिया में तेजी लाने की आवश्यकता बताई है।
मान्यता प्राप्त 35 संस्थानों में सबसे अधिक 26 हरिद्वार जिले के हैं। इसके अलावा सात देहरादून और दो ऊधम सिंह नगर के संस्थान शामिल हैं। प्राधिकरण ने अक्टूबर तक कम से कम 100 अल्पसंख्यक विद्यालयों को मान्यता प्रमाणपत्र देने का लक्ष्य रखा है।
452 मदरसों की हुई थी पहचान
नई व्यवस्था लागू होने से पहले प्रदेश में 452 मदरसों का रिकॉर्ड था। इनमें 400 सीनियर और 52 जूनियर स्तर के मदरसे शामिल थे। विभाग के अनुसार 227 मदरसे बंद हो चुके हैं, जबकि 19 अवैध रूप से संचालित संस्थानों को सील किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में आधुनिक शिक्षा और निर्धारित शैक्षणिक मानकों के पालन पर जोर दिया जा रहा है। धार्मिक शिक्षा को ऐच्छिक रखा गया है।





