संयुक्त राष्ट्र: भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार को लेकर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि केवल गैर-स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। भारत ने स्थायी सदस्यता व्यवस्था में बदलाव और स्थायी सीटों के विस्तार की मांग दोहराई है।
संयुक्त राष्ट्र में अंतर-सरकारी वार्ता (IGN) की बैठक में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पार्वथनेनी हरीश ने कहा कि अगर सुधार प्रक्रिया केवल गैर-स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने तक सीमित रहती है, तो इससे सुरक्षा परिषद की मौजूदा शक्ति संरचना में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा।
भारत ने कहा कि वास्तविक सुधार के लिए स्थायी सदस्यता श्रेणी का विस्तार जरूरी है। नई दिल्ली लंबे समय से यह तर्क देता रहा है कि मौजूदा सुरक्षा परिषद 21वीं सदी की वैश्विक वास्तविकताओं का सही प्रतिनिधित्व नहीं करती।
भारत के अनुसार, सुरक्षा परिषद में दुनिया के बड़े क्षेत्रों और विकासशील देशों की बेहतर भागीदारी होनी चाहिए। भारत ने यह भी कहा कि सुधार प्रक्रिया को ठोस बातचीत और लिखित प्रस्तावों के आधार पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि चर्चा किसी निष्कर्ष तक पहुंच सके।
वर्तमान में UNSC के पांच स्थायी सदस्य हैं—अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन। इन देशों के पास वीटो अधिकार भी है। भारत का कहना है कि किसी भी प्रभावी सुधार में सदस्यता और निर्णय लेने की प्रक्रिया दोनों में बदलाव जरूरी है।
भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट की दावेदारी कर रहा है। नई दिल्ली का तर्क है कि दुनिया की बड़ी आबादी, आर्थिक क्षमता और वैश्विक शांति अभियानों में योगदान के आधार पर भारत को स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए।
भारत ने चेतावनी दी कि अगर सुधार के नाम पर केवल सीमित बदलाव किए गए तो इससे परिषद की विश्वसनीयता और प्रतिनिधित्व पर सवाल बने रहेंगे। अब नजर इस बात पर है कि UNSC सुधार वार्ता में आगे क्या प्रगति होती है।





