नई दिल्ली/एवियन-ले-बैंस: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में वैश्विक समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। सत्र के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उनके बगल में बैठे थे। पीएम मोदी ने कहा कि समुद्री व्यापार से दुनिया को जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा सभी देशों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
पीएम मोदी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते सुरक्षित रहने चाहिए और नाविकों को बिना किसी डर के अपनी जिम्मेदारियां निभाने का माहौल मिलना चाहिए। उनके इस बयान को हाल में ओमान तट के पास एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले में भारतीय नाविकों की मौत से जोड़कर देखा जा रहा है।
दरअसल, हाल में एक जहाज पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई थी। इस घटना के बाद भारत ने चिंता जताई थी और मामले को कूटनीतिक स्तर पर उठाया था। भारत ने कहा था कि व्यापारिक जहाजों और उनमें काम करने वाले नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।
जी-7 सत्र में पीएम मोदी ने वैश्विक सहयोग और भरोसे की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती संसाधनों की कमी नहीं बल्कि आपसी भरोसे की कमी है। भारत ने हमेशा संवाद और सहयोग के माध्यम से वैश्विक समस्याओं के समाधान की वकालत की है।
इससे पहले भारतीय पक्ष ने अमेरिकी अधिकारियों के सामने भी भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा उठाया था। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस मामले में अमेरिका से चिंता जताई थी।
पीएम मोदी का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ी हुई है। भारत ने साफ किया है कि समुद्री सुरक्षा केवल व्यापार का मुद्दा नहीं बल्कि मानवीय सुरक्षा का भी विषय है।





