कर्णप्रयाग/चमोली। उत्तराखंड की प्रसिद्ध धार्मिक यात्रा नंदा राज जात यात्रा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। वर्ष 2027 में प्रस्तावित नंदा राजजात यात्रा के सफल आयोजन के लिए चमोली जिले के वांण गांव के लोगों ने आपसी सहमति बनाते हुए आगे की तैयारियों पर चर्चा शुरू कर दी है।
वांण गांव को नंदा राजजात यात्रा के प्रमुख पड़ावों में से एक माना जाता है। ग्रामीणों ने बैठक कर यात्रा से जुड़े व्यवस्थागत पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। इसमें यात्रा मार्ग, श्रद्धालुओं की सुविधा, पारंपरिक व्यवस्थाओं और स्थानीय जिम्मेदारियों को लेकर चर्चा की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि नंदा राजजात केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ी हुई है। इसलिए इसके आयोजन में स्थानीय परंपराओं और रीति-रिवाजों का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
बैठक में ग्रामीणों ने तय किया कि यात्रा के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए समय रहते तैयारियां शुरू की जाएंगी। साथ ही गांव स्तर पर जिम्मेदारियां तय कर व्यवस्थाओं को मजबूत किया जाएगा।
हर 12 साल में आयोजित होने वाली नंदा राजजात यात्रा में देश-विदेश से श्रद्धालु शामिल होते हैं। यात्रा हिमालयी क्षेत्र के कठिन मार्गों से होकर गुजरती है, इसलिए इसके लिए प्रशासन और स्थानीय समुदाय दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।
वर्ष 2027 की यात्रा को लेकर अभी से तैयारियां शुरू होने से स्थानीय लोगों में उत्साह देखा जा रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि बेहतर समन्वय और तैयारी के साथ इस बार की यात्रा को यादगार बनाया जा सकता है।
नंदा राजजात को उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है और इसके आयोजन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी आगे की तैयारियां की जाएंगी।





