मुंबई। शिवसेना नेता और राज्यसभा सांसद Sanjay Raut ने पार्टी के बागी नेताओं पर की गई अपनी विवादित टिप्पणी का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने जो कहा, वह परिस्थितियों के अनुरूप था और अपने बयान पर उन्हें कोई पछतावा नहीं है। राउत ने स्पष्ट किया कि उनकी भाषा और शैली को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
पार्टी में जारी अंदरूनी खींचतान और बगावत की अटकलों के बीच राउत ने बागी नेताओं पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग वर्षों तक पार्टी में रहकर कठिन समय में साथ नहीं देते, उनके प्रति कार्यकर्ताओं में स्वाभाविक नाराजगी है। राउत ने दावा किया कि उनकी टिप्पणी किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पार्टी के प्रति निष्ठा छोड़ने वालों के खिलाफ थी।
विपक्षी दलों और राजनीतिक विरोधियों ने राउत की भाषा पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, शिवसेना नेता ने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति में कई बार भावनाओं को व्यक्त करने के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है और उनके बयान को संदर्भ से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए।
इस बीच महाराष्ट्र की राजनीति में संभावित टूट और दल-बदल की चर्चाओं ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। राउत ने आरोप लगाया कि कुछ सांसदों को पार्टी छोड़ने के लिए बड़े आर्थिक प्रलोभन दिए जा रहे हैं। उन्होंने बागी नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे जनता का समर्थन होने का दावा करते हैं तो इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ें।
राउत के बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। सत्तापक्ष के नेताओं ने उनकी भाषा की आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया है, जबकि शिवसेना (उद्धव गुट) के समर्थक इसे पार्टी के प्रति निष्ठा की अभिव्यक्ति बता रहे हैं।





