नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा उपचुनावों से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहे संगठनात्मक विवाद के बीच चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश जारी किया है। आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के नाम और उसके आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया है।
आयोग के मुताबिक, पार्टी के भीतर दो गुट अपने-अपने को वास्तविक TMC बताकर संगठन पर नियंत्रण का दावा कर रहे हैं। विवाद का अंतिम निपटारा होने तक दोनों पक्षों को अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ उपचुनाव लड़ना होगा। आयोग ने दोनों गुटों से 18 सितंबर सुबह 11 बजे तक तीन-तीन वैकल्पिक नाम और तीन-तीन मुक्त चुनाव चिह्नों के विकल्प देने को कहा है।
यह विवाद पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर सामने आया है। चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि मामले में विस्तृत निर्णय की आवश्यकता है। तब तक अंतरिम व्यवस्था के तहत दोनों गुटों को समान अवसर देने के लिए मौजूदा पार्टी नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज किया गया है।
कांग्रेस ने आयोग पर उठाए सवाल
चुनाव आयोग के फैसले के बाद कांग्रेस ने इसकी आलोचना की। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए फैसले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए “लेट नाइट बर्थडे गिफ्ट” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले से ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को नुकसान पहुंच सकता है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए और ममता बनर्जी के पक्ष में पुराने चुनाव चिह्न को बहाल करने की मांग की।
आयोग का यह अंतरिम आदेश पश्चिम बंगाल में होने वाले उपचुनावों तक तत्काल प्रभाव से लागू रहेगा। विवाद पर अंतिम फैसला आने के बाद ही पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।





