नैनीताल। सरोवर नगरी में चल रहे 124वें नंदा देवी महोत्सव के दूसरे दिन गुरुवार को मंगोली से कदली वृक्ष नैनीताल लाए गए। धार्मिक परंपरा के अनुसार इन कदली वृक्षों से मां नंदा-सुनंदा की मूर्तियों का निर्माण किया जाएगा। कदली वृक्षों के नगर भ्रमण के दौरान पूरा शहर मां नंदा-सुनंदा के जयकारों से गूंज उठा।
मंगोली गांव में रातभर पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन के बाद गुरुवार सुबह विधि-विधान से मूर्ति निर्माण के लिए कदली वृक्षों का चयन किया गया। दोपहर करीब ढाई बजे श्रद्धालुओं का दल कदली वृक्ष लेकर नैनीताल पहुंचा। सूखाताल में स्थानीय लोगों ने उनका स्वागत किया। महिलाओं ने घरों की छतों से कदली वृक्षों पर अक्षत और फूल बरसाए।
इसके बाद कदली वृक्षों को तल्लीताल स्थित वैष्णो देवी मंदिर ले जाया गया, जहां विधिवत पूजा-अर्चना की गई। यहां से भव्य सांस्कृतिक शोभायात्रा शुरू हुई। तल्लीताल से मालरोड, मल्लीताल, चीना बाबा और मल्लीताल बाजार होते हुए शोभायात्रा नयना देवी मंदिर परिसर पहुंची। इस दौरान श्रद्धालु कंधों पर कदली वृक्ष लेकर मां नंदा-सुनंदा के जयकारे लगाते रहे।
छोलिया नृत्य और लोक संस्कृति ने बांधा समां
शोभायात्रा में स्कूली बच्चों की झांकियां, छोलिया कलाकारों का नृत्य और महिलाओं की झोड़ा प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही। पारंपरिक लोकधुनों और भजनों के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु यात्रा में शामिल हुए। इससे नैनीताल की सड़कें धार्मिक आस्था के साथ कुमाऊं की लोकसंस्कृति के रंग में रंग गईं।
शुक्रवार से नयना देवी मंदिर के समीप सेवा समिति भवन में कदली वृक्षों से मां नंदा-सुनंदा की मूर्तियों का निर्माण शुरू किया जाएगा। महोत्सव के आगामी कार्यक्रमों में धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन जारी रहेगा।





