नई दिल्ली, 1 सितंबर। NEET परीक्षा विवाद को लेकर जुलाई में हुए छात्र प्रदर्शनों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों से संबंधित देशभर में दर्ज FIR को रद्द करने का आदेश दिया। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह राहत दी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन प्रदर्शनों से संबंधित ऐसी FIR, जो अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज हुई हैं, उन्हें आगे नहीं बढ़ाया जाएगा और उनकी जांच भी नहीं की जाएगी। साथ ही, इन घटनाओं के संबंध में नई FIR दर्ज करने पर भी रोक लगा दी गई है।
2,873 लोगों को लेकर अलग निर्देश
हालांकि कोर्ट ने एक अपवाद रखा है। दिल्ली पुलिस को करीब 2,873 ऐसे लोगों के खिलाफ अलग FIR दर्ज करने की अनुमति दी गई है, जिनके गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड होने की बात सामने आई है। यह कार्रवाई केवल हिंसा, शारीरिक नुकसान या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोपों की जांच तक सीमित रहेगी।
आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा
सुप्रीम कोर्ट ने NEET 2026 से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के लिए देशव्यापी नीति बनाने का निर्देश भी दिया। केंद्र सरकार को इस संबंध में नीति तैयार कर प्रभावित परिवारों को तीन महीने के भीतर मुआवजा देने की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है।
CJP ने 5 सितंबर का मार्च किया रद्द
सुप्रीम कोर्ट के फैसले और केंद्र सरकार के आश्वासन के बाद CJP ने दिल्ली में 5 सितंबर को प्रस्तावित विरोध मार्च वापस लेने की घोषणा की। संगठन के सह-संयोजक सौरव दास ने अदालत में कहा कि सरकार के सकारात्मक आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देखते हुए मार्च का आह्वान वापस लिया जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने दोनों पक्षों के सकारात्मक रुख का स्वागत करते हुए कहा कि खुले मन से बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान संभव है।





