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12 साल बाद नंदा देवी की बड़ी जात, सुंग गांव का चौसिंग्या खाडू बनेगा मां नंदा का मार्गदर्शक

चमोली, 1 सितंबर। उत्तराखंड के चमोली जिले में मां नंदा देवी की ऐतिहासिक बड़ी जात यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। पांच सितंबर से शुरू होने वाली इस धार्मिक यात्रा में नंदानगर के सुंग गांव का आठ माह का दुर्लभ चौसिंग्या खाडू (चार सींगों वाला मेढ़ा) मां नंदा की कैलाश यात्रा में मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगा।

सुंग गांव निवासी रमेश सिंह बिष्ट ने इस चौसिंग्या खाडू को जन्म के समय ही मां नंदा की जात के लिए समर्पित कर दिया था। पिछले तीन महीने तक यह मेढ़ा चीन सीमा क्षेत्र के लपथल बुग्याल में चराई के लिए गया था। 28 अगस्त को इसे वापस सुंग गांव लाया गया। तीन सितंबर को इसे कुरुड़ मंदिर ले जाया जाएगा, जहां से पांच सितंबर को मां नंदा की कैलाश विदाई के दौरान यह यात्रा के आगे चलेगा।

देवी का शुभदूत माना जाता है चौसिंग्या खाडू

मान्यता है कि नंदा देवी की बड़ी जात 12 वर्ष में आयोजित होती है। यात्रा से पहले क्षेत्र के किसी गांव में चार सींगों वाला खाडू जन्म लेता है, जिसे मां नंदा का शुभदूत और संदेशवाहक माना जाता है। करीब 280 किलोमीटर लंबी कठिन पैदल यात्रा में यह खाडू मां नंदा की डोली और श्रद्धालुओं के आगे चलता है। श्रद्धालु उसकी पीठ पर मां नंदा के लिए वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, स्थानीय पकवान और आभूषण बांधते हैं।

यात्रा के अंतिम पड़ाव होमकुंड में पूजा के बाद चौसिंग्या खाडू को इन सामग्रियों के साथ कैलाश की ओर अकेले विदा किया जाता है। इस परंपरा को मां नंदा के कैलाश गमन से जोड़ा जाता है।

20 सितंबर को होमकुंड में होगी विदाई

बड़ी जात पांच सितंबर को कुरुड़ मंदिर से शुरू होकर विभिन्न पड़ावों से होते हुए 18 सितंबर को वेदनी बुग्याल पहुंचेगी। इसके बाद यात्रा रूपकुंड, ज्योंरागली और शिलासमुद्र होते हुए 20 सितंबर को होमकुंड पहुंचेगी। यहां मां नंदा की पूजा के बाद चौसिंग्या खाडू को कैलाश की ओर विदा किया जाएगा।

इसके बाद श्रद्धालु वापसी यात्रा शुरू करेंगे और 30 सितंबर को मां नंदा की डोली के सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर पहुंचने के साथ बड़ी जात का समापन होगा।

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