पंचकूला। हरियाणा के चर्चित IDFC फर्स्ट बैंक घोटाले की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा कदम उठाते हुए कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों और एक आईएफएस अधिकारी के आवासों पर छापेमारी की है। जांच एजेंसी ने चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर में एक साथ कार्रवाई कर महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए हैं।
सीबीआई के अनुसार, यह मामला हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन के विभिन्न विभागों के सैकड़ों करोड़ रुपये के सरकारी धन के कथित गबन से जुड़ा है। जांच में सामने आया है कि सरकारी खातों को निजी बैंकों में खुलवाने और उनके संचालन में कुछ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध रही है। एजेंसी को आशंका है कि सरकारी धन को नियमों के विपरीत तरीके से अन्य खातों में स्थानांतरित किया गया।
सूत्रों के मुताबिक, छापेमारी के दौरान अधिकारियों के मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल उपकरणों की भी जांच की गई। इससे पहले भी सीबीआई कई वरिष्ठ नौकरशाहों से पूछताछ कर चुकी है और उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए थे।
जांच एजेंसियों के अनुसार, घोटाले की राशि 590 करोड़ रुपये से लेकर 661 करोड़ रुपये तक बताई जा रही है। आरोप है कि हरियाणा सरकार के कई विभागों और बोर्डों के खातों से धन की अनियमित निकासी की गई। मामले में बैंक अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों की मिलीभगत की भी जांच चल रही है।
सीबीआई पहले ही इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और कुछ के खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल किए जा चुके हैं। हाल ही में एजेंसी ने नौ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर मामले की जांच को और तेज कर दिया है।
जांच एजेंसी का कहना है कि छापेमारी के दौरान मिले साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है और आने वाले दिनों में मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। इस कार्रवाई के बाद हरियाणा के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।





