नई दिल्ली। सीजेपी (Cockroach Janta Party) के प्रदर्शन और प्रधानमंत्री आवास के पास हुए विरोध को लेकर दिल्ली की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया है। इस मामले में सत्तापक्ष ने आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस पर आंदोलन को कमजोर करने तथा राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया है। वहीं विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया है।
सीजेपी की ओर से संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया था। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद विपक्षी दलों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया। कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन कर छात्रों के मुद्दे पर जवाबदेही की मांग की।
इस बीच आरोप लगाया गया कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की सक्रियता से सीजेपी का मूल आंदोलन प्रभावित हुआ। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अलग-अलग विपक्षी दलों के समर्थन से आंदोलन का स्वरूप बदल रहा है और इसे लेकर विपक्षी एकजुटता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
सीजेपी का आंदोलन परीक्षा में कथित अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से जवाबदेही और संबंधित मांगों पर कार्रवाई की मांग की है। संसद की ओर मार्च के दौरान सुरक्षा बलों ने बैरिकेड लगाए थे और स्थिति नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की गई थी।
कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। दूसरी ओर, सरकार समर्थक नेताओं का कहना है कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहा है।
मामले को लेकर आगे भी राजनीतिक बयानबाजी जारी रहने की संभावना है। सीजेपी आंदोलन अब केवल छात्र मुद्दों तक सीमित न रहकर व्यापक राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।





