नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को लेकर मंगलवार को विपक्षी सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग तक मार्च निकाला। कांग्रेस समेत INDIA गठबंधन के करीब 150 सांसदों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। पुलिस ने संसद मार्ग पर आकाशवाणी भवन के पास बैरिकेडिंग कर मार्च को रोक दिया, जिसके बाद विपक्षी सांसद वहीं धरने पर बैठ गए।
प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने किया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि उन्हें चुनाव आयोग तक जाने और मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात करने की अनुमति दी जाए। पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद कई विपक्षी सांसदों ने बैरिकेडिंग के पास नारेबाजी की। कुछ सांसद बैरिकेड पर भी चढ़ गए।
आकाशवाणी भवन में धरने पर बैठे राहुल-प्रियंका
विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंचे और वहां धरने पर बैठ गए। कुछ देर बाद प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कांग्रेस के अन्य नेता भी उनके साथ धरने में शामिल हो गए। राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष चुनाव आयोग से मिलकर अपनी शिकायतें रखना चाहता है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए।
इस दौरान पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी समेत कई विपक्षी नेता भी हिरासत में लिए गए। प्रदर्शन में बीजू जनता दल भी पहली बार विपक्षी दलों के इस संयुक्त आंदोलन में शामिल हुआ।
रात आठ बजे हिरासत, दो घंटे बाद रिहाई
करीब आठ घंटे तक धरने पर बैठे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं को दिल्ली पुलिस ने रात करीब आठ बजे हिरासत में लेकर आकाशवाणी भवन से हटाया। उन्हें करीब 50 अन्य सांसदों के साथ किंग्सवे कैंप स्थित न्यू पुलिस लाइन ले जाया गया। करीब दो घंटे हिरासत में रखने के बाद रात 10 बजे के बाद सभी को रिहा कर दिया गया।
वहीं, चुनाव आयोग ने अपने पक्ष में कहा कि किसी राजनीतिक दल ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत पहले से औपचारिक मुलाकात का समय नहीं मांगा था। आयोग के अनुसार, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडल के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपॉइंटमेंट लिया जाता है।





