नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्ष की कुछ ताकतों पर भारत को अस्थिर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि जायज जनहित के मुद्दों की आड़ में हिंसा और साजिश के जरिए सत्ता परिवर्तन की कोशिश की जा रही है। त्रिवेदी ने ऐसी ताकतों की तुलना रावण के दस सिरों से करते हुए कहा कि एक मांग पूरी होने पर दूसरी मांग सामने आ जाती है।
तीन एजेंडे गिनाकर विपक्ष पर साधा निशाना
बुधवार को अपने संबोधन में सुधांशु त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री के विजयादशमी संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को अस्थिर करने की कोशिश करने वाली ताकतों के तीन प्रमुख एजेंडे हैं। इनमें निजी हितों के लिए सत्ता और संसाधनों का इस्तेमाल करना, समाज में विभाजन पैदा करना और भारतीय संस्कृति तथा धर्म के प्रति नफरत फैलाना शामिल है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ समूह सनातन धर्म और हिंदुत्व के खिलाफ अभियान चलाते हैं तथा देश की प्रमुख संस्थाओं को लेकर भ्रामक बातें फैलाते हैं। हालांकि, ये आरोप भाजपा सांसद के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।
ईवीएम और मतदाता सूची पर उठाए सवाल
त्रिवेदी ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी), हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) जैसी संस्थाओं को लेकर उठने वाले सवालों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने वैक्सीन, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया।
भाजपा सांसद ने कहा कि अलग-अलग आंदोलनों में बार-बार नई मांगें उठाई जाती हैं। इसी क्रम में उन्होंने इन मांगों की तुलना रावण के दस सिरों से की।
रामायण के प्रसंग का दिया उदाहरण
त्रिवेदी ने रामायण में रावण द्वारा साधु का वेश धारण कर माता सीता का अपहरण करने के प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें भी अपनी वास्तविक मंशा छिपाकर सामने आती हैं और जनहित की मांगों को माध्यम बनाती हैं।
उन्होंने दावा किया कि इन ताकतों का उद्देश्य हिंसा और सुनियोजित साजिश के जरिए सत्ता परिवर्तन करना है।
विरोध प्रदर्शनों को लेकर जारी है राजनीतिक टकराव
भाजपा सांसद की यह टिप्पणी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच आई है। विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारियों ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे उठाए हैं, जबकि भाजपा ने इन गतिविधियों के पीछे व्यापक राजनीतिक साजिश होने का आरोप लगाया है।
इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।





