नई दिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत को भरोसा दिलाया है कि पाकिस्तान या दुनिया के किसी अन्य देश के साथ अमेरिका के संबंध भारत के साथ उसकी साझेदारी की कीमत पर नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन भारत के साथ अपने रिश्तों को इस नजरिये से नहीं देखता कि किसी दूसरे देश के साथ संबंध मजबूत करने से भारत के साथ साझेदारी प्रभावित हो।
रूबियो ने यह बात भारत दौरे के दौरान द इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक साक्षात्कार में कही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व के बीच बढ़ते संपर्कों को लेकर भारत में उठ रही चिंताओं के बीच उनके इस बयान को अहम माना जा रहा है।
1970 के दशक से आज के हालात अलग
अमेरिकी विदेश मंत्री से पूछा गया कि क्या अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकी 1970 के दशक के निक्सन-किसिंजर दौर की याद दिलाती है, जब अमेरिकी प्रशासन पर पाकिस्तान की ओर झुकाव रखने के आरोप लगे थे।
इस पर रूबियो ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों की तुलना 1970 के दशक से करना उचित नहीं होगा। उस समय शीत युद्ध चल रहा था और वैश्विक राजनीति की परिस्थितियां आज से काफी अलग थीं। उन्होंने कहा कि अब दुनिया बदल चुकी है और उस दौर की कई परिस्थितियां मौजूद नहीं हैं।
पाकिस्तान से संबंध बनाए रखना जरूरी
रूबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के पाकिस्तान के साथ भी संबंध हैं और उन्हें बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका विभिन्न देशों के साथ अपने रिश्तों का इस्तेमाल सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए कर सकता है।
उनके मुताबिक, पाकिस्तान के साथ संवाद बनाए रखने से अमेरिका को ऐसे कदमों को रोकने में मदद मिल सकती है, जो क्षेत्रीय तनाव बढ़ा सकते हैं या भारत की सुरक्षा संबंधी चिंताओं का कारण बनते हैं।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी जोर
रूबियो ने भारत के साथ मजबूत संबंधों के प्रमाण के रूप में दोनों देशों के बीच जारी बातचीत, व्यापार समझौते की कोशिशों और आपसी सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका कई क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री के बयान से स्पष्ट है कि वाशिंगटन भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को महत्व देता है, जबकि पाकिस्तान के साथ संबंध भी बनाए रखना चाहता है। ऐसे में अमेरिका के सामने दोनों देशों के साथ अपने रिश्तों में संतुलन बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है।





