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‘यूएन एक्सपर्ट्स’ शब्द ही विरोधाभासी, भारत के प्रदर्शन आंतरिक मामला: मार्को रूबियो

नई दिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत में चुनाव आयोग के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों की आलोचना को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इन प्रदर्शनों को भारत का आंतरिक राजनीतिक मामला बताते हुए कहा कि इस पर फैसला भारतीयों को ही करना चाहिए। रूबियो ने संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों पर तंज कसते हुए ‘यूएन एक्सपर्ट्स’ शब्द को ही विरोधाभासी करार दिया।

रूबियो बुधवार को भारत में विपक्षी दलों और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों पर संयुक्त राष्ट्र की टिप्पणी से जुड़े सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका भारत के घरेलू राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहता।

लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन अहम

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां चुनाव होते हैं और लोगों को अपनी राजनीतिक राय व्यक्त करने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग विचारों को सामने रखना और राजनीतिक मुद्दों पर बहस करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण विशेषता है।

रूबियो ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों और हिंसक दंगों के बीच अंतर भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि वह उन घटनाओं की बात नहीं कर रहे, जिनमें इमारतों में तोड़फोड़ की जाती है या उन्हें आग के हवाले कर दिया जाता है। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक समाज में लोगों का अपनी बात रखना और राजनीतिक मतभेद जाहिर करना सामान्य प्रक्रिया है।

उन्होंने क्यूबा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां विपक्षी आवाजों को कई तरह की पाबंदियों का सामना करना पड़ता है। इसके विपरीत लोकतंत्र में राजनीतिक असहमति व्यक्त करने की गुंजाइश होती है।

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने जताई थी चिंता

दरअसल, संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भारत में विपक्षी दलों और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित कार्रवाई पर चिंता जताई थी। विशेषज्ञों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कथित बल प्रयोग, हिरासत और सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंधों को लेकर सवाल उठाए थे।

ये प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े विवाद के बीच हो रहे हैं। विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने तथा चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर आपत्ति जताई है।

भारत ने भी खारिज किए आरोप

इससे पहले भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर इन आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा था कि अपुष्ट आरोपों और अधूरे आंकड़ों के आधार पर देश की नकारात्मक छवि पेश करना उचित नहीं है। भारत ने यह भी कहा कि मानवाधिकारों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने या चुनिंदा देशों को निशाना बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

रूबियो के बयान के बाद इस मुद्दे पर भारत, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के रुख को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत के आंतरिक राजनीतिक मामलों पर निर्णय लेने का अधिकार वहां के लोगों का है।

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