नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग में कथित मतभेदों की खबरों के बीच आयोग ने बुधवार को आठ बिंदुओं में अपना पक्ष स्पष्ट किया। आयोग ने कहा कि किसी संस्था में अलग-अलग राय और सुझाव आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम निर्णय से पहले इस तरह के विचार-विमर्श होते हैं।
आयोग ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324, संबंधित कानूनों और स्थापित संस्थागत प्रक्रियाओं के तहत एक बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था के रूप में काम करता है। आयोग के अनुसार उसके सभी आधिकारिक आदेश, फैसले और प्रशासनिक निर्देश निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के अनुरूप जारी किए जाते हैं।
SIR से जुड़े मामलों में अधिकारियों और आयुक्तों की ओर से उठाए गए सवालों को आयोग ने सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया। आयोग का कहना है कि ऐसे सुझाव मतदाता अधिकारों की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया को बेहतर बनाने के उद्देश्य से दिए जाते हैं।
आयोग ने यह भी कहा कि पिछले एक वर्ष में SIR सहित मतदाता सूची पुनरीक्षण और अन्य चुनावी सुधारों से जुड़े करीब 40 नए कदम उठाए गए हैं। आयोग के मुताबिक ये फैसले पूरे आयोग की सहमति से लिए गए हैं।
दरअसल, एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कई मुद्दों पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। रिपोर्ट में SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर दोनों आयुक्तों की असहमति का उल्लेख किया गया था।
आयोग ने इन दावों के जवाब में कहा कि SIR समेत सभी महत्वपूर्ण फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
आयोग ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINet को लेकर भी कहा कि वहां डेटा सुरक्षा के लिए सख्त साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल और ऑडिट व्यवस्था लागू है। आयोग ने दोहराया कि वह अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन पूरी प्रतिबद्धता के साथ कर रहा है।



