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राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए ऐसे होती है एडीसी की ट्रेनिंग, मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने बताई पूरी प्रक्रिया

नई दिल्ली। राष्ट्रपति की सुरक्षा और उनके साथ हर समय समन्वय बनाए रखने वाले एड-डि-कैंप (ADC) की जिम्मेदारी बेहद संवेदनशील होती है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व एडीसी मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने एक पॉडकास्ट में एडीसी की ट्रेनिंग और जिम्मेदारियों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।

मेजर सांब्याल के अनुसार, एडीसी को बेहद सतर्क और परिस्थितियों को तुरंत समझने में सक्षम बनाने के लिए कठिन प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान करीब 70 से 80 किलोग्राम वजन लेकर चलने जैसी शारीरिक चुनौतियां दी जाती हैं। उनके मुताबिक, 30 से 40 दिनों तक पानी, भोजन और नींद की कमी जैसी कठिन परिस्थितियों में भी प्रशिक्षण कराया जाता है।

नजर और याददाश्त की भी होती है परीक्षा

सांब्याल ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल शारीरिक क्षमता बढ़ाना नहीं, बल्कि अधिकारी की निरीक्षण क्षमता और सतर्कता को मजबूत करना भी है। प्रशिक्षण के दौरान करीब एक किलोमीटर के गोलाकार रास्ते पर चलाया जाता है। रास्ते में अलग-अलग स्थानों पर कुछ वस्तुएं जानबूझकर रखी जाती हैं। बाद में अधिकारी से पूछा जाता है कि उसने रास्ते में क्या-क्या देखा। इस तरह छोटी से छोटी चीज पर ध्यान देने की आदत विकसित की जाती है।

राष्ट्रपति के आसपास सुरक्षा का घेरा

मेजर सांब्याल ने बताया कि राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए उनके आसपास लगभग एक किलोमीटर का क्षेत्र सैनिटाइज किया जाता है। इस क्षेत्र में हथियार, धातु या अन्य खतरनाक वस्तुओं की मौजूदगी को लेकर विशेष सतर्कता बरती जाती है। राष्ट्रपति के आसपास मौजूद लोगों और वस्तुओं पर भी एडीसी को लगातार नजर रखनी होती है।

एडीसी की भूमिका केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं होती। वह राष्ट्रपति की आधिकारिक और अनौपचारिक गतिविधियों में समन्वय की महत्वपूर्ण कड़ी होता है। राष्ट्रपति को किसी अधिकारी या प्रधानमंत्री से बातचीत करनी हो तो एडीसी संबंधित लोगों से संपर्क कर व्यवस्था सुनिश्चित करता है।

मेजर सांब्याल ने बताया कि इस पद पर अनुशासन, सतर्कता और जिम्मेदारी सर्वोच्च प्राथमिकता होती है।

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